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डोंट वरी बी हैप्पी !

aaina

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हैप्पीनैस इंडेक्स में भारत वर्ष का स्थान पाक- नेपाल- बांग्लादेश और भूटान से भी नीचे देखकर विरोधियों को सरकार पर हमला करने का बैठेबिठाये एक और मुद्दा मिल गया है,सरकार की गिरती रेटिंग देखकर उनकी बांछें,जहां भी होती हैं खिल गयी हैं।विरोधियों के हमले के प्रतिरोध में जी डी पी,कृषि विकास दर और टॉयलेट सृजन के बढ़ते आंकड़े जैसी उपलब्धियां  गिनाते -गिनाते सरकारी प्रवक्ताओं के मुंह से झाग निकलने लगा है। 
सरकार के माथे की लकीरें और गहरी गयी हैं,आखिर ससुरे नागरिक खुश क्यों नहीं हैं,जबकि सरकार ने सम्मान से मरने तक का हक दे दिया है और क्या करें?उन्होंने अपने एकमात्र सुपर सिपहसालार की आपात बैठक बुलाई है,जिसमें मंथन किया जायेगा कि लोग खुश क्यों नहीं हैं?उनको खुश होने से कौन रोक रहा है,कहीं विरोधियों  की साजिश तो नहीं।पार्टी की धर्मसंसद को संदेश दिया गया है कि नगरिकों को खुश रहने के नये नये मंत्र दिये जाये ,यदि जरूरी हो तो तंत्र साधना,जप तप के वृहत आयोजन शहर- शहर संपन्न किये जायें।पार्टी के पत्र और कला प्रकोष्ठ को भी आनन फानन में आदेशित कर दिया गया है कि “खुशी-खुशी कैसे जियें” विषय पर संवाद, विमर्श, नाटक- पोस्टर, नारे लेखन प्रतियोगिता आयोजित करें।अखबार- टीवी के विज्ञापनों के मद में भारी वृद्धि किये जाने के संकेत दे दिए गए हैं।साथ ही न्यूज एंकरों को इशारा कर दिया गया है कि खुशहाल भारत की लघुफिल्म प्रदर्शित करें ,बहस करायें और विपक्ष को देश की छवि धूमिल करने के लिये जिम्मेदार ठहराया जाये कि ये लोग नागरिको को बरगलाने का काम कर रहे है, लोगों को खुश नहीं होने दे रहे हैं ।”मस्त और तंदुरुस्त भारत” जैसे नारों से गली -देहात- शहर की दीवारों को पाट दिया जाय।कुछ विदेशी राजनयिक और पत्रकारों को बाइज्जत आमंत्रित किया जाय और उनके सामने पार्टी के कवियों के “गाओ खुशी के गीत “टाईप काव्य पाठ और मुशायरे आयोजित किये जायें ।– और अगर अगर फिर भी जो नागरिक खुश होने में ना नुकुर करें तो ऐसे ससुरों को तुरंत राष्ट्रद्रोही घोषित किया जाये।कमाल है ये लोग हमारी खुशी के लिए खुश भी नहीं हो सकते। जरूर ये भटके हुए लोग हैं ,इनको खुशहाल भारत की मुख्यधारा में लाने के लिए जो भी किया जाना जरुरी हो तुरंत किया जाय। यदि जरुरी हो तो शक्तिबल का भी प्रयोग किया जाए चाहे जैसे हो इन लोगों को खुश होना ही होगा। देश के लिए मुस्कराइए और खुश रहिये। 
 
 
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