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टीम इंडिया हाय-हाय!

ब्रज की दुनिया

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मित्रों,१९३२ का ओलंपिक चल रहा था. भारत और अमेरिका की hocky टीमें आमने-सामने थीं. मेजर ध्यानचंद गोल-पर-गोल दाग रहे थे. अंततः भारत ने अमेरिका को २४-१ से हरा दिया. इस करारी और शर्मनाक हार का असर यह हुआ कि उसके बाद अमेरिका ने hocky खेलना ही बंद कर दिया. हो सकता है कि आपमें से कुछ मित्र कहें कि अमेरिका ने सही किया लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता. खेल खेल होता है और उसको खेल की तरह ही लेना चाहिए. जिस दिन जो टीम अच्छा खेलेगी जीतेगी.
मित्रों, हमने देखा है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होता है तब वो मैच रह ही नहीं जाता बल्कि हम क्रिकेट प्रशंसक उसे युद्ध बना देते हैं. मानों एक मैच जीत जाने से भारत का पाकिस्तान पर कब्ज़ा हो जाएगा या फिर हार जाने से हम पाकिस्तान के गुलाम हो जाएँगे. एक समय कोलकाता में दर्शकों ने गावस्कर का घोर अपमान किया था और फिर गावस्कर कोलकाता में कभी नहीं खेले.
मित्रों, कल रात जबसे भारतीय क्रिकेट टीम चैम्पियंस ट्राफी के फाइनल में पाकिस्तान से हारी है पूरे भारत में टीम इण्डिया के खिलाफ गुस्से का तूफ़ान आया हुआ है. मानों क्रिकेट ही देश के लिए सबकुछ हो या फिर देश में क्रिकेट के अलावा कुछ और खेला ही नहीं जाता हो. कल ही भारत ने hocky में पाकिस्तान को ७-१ से धूल चटाई है क्या यह कम गौरव की बात है? बैडमिंटन में भी भारत के अग्रणी पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने कल इंडोनेशिया ओपन जीत लिया है और वह यह खिताब जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। क्या यह हमारे लिए गौरव ही बात नहीं है? कल एशियाड या ओलंपिक में बैडमिंटन और hocky ही खेले जाएंगे क्रिकेट नहीं फिर सिर्फ क्रिकेट के लिए ऐसी दीवानगी क्यों?
मित्रों, इतना ही नहीं क्रिकेट तो कई-कई बार कलंकित भी चुका है. लोग रिश्वत खाकर मैच हार जाते हैं. अब कल के मैच को ही लें तो भारत के तरफ से पांड्या को छोड़कर किसी ने भी कोशिश भी की क्या? क्या मैच देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि टीम इण्डिया जान-बूझकर हारने के लिए खेल रही है?

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