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हम सब के दामन पर दाग है

Idhar udhar ki

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आज किसी बच्चे से भी पूछो तो वह बड़ी आसानी से बता देगा कि धरती घूम रही है लेकिन तब क्या हो गया था?जब गैलेलियो ने यही सब कहा था।सुनते ही बवाल उठ खड़ा था, इक तूफान सा आ गया था।सुनते ही उस समय के हुक्मरानों ने गैलिलियो को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित किया।
एक लकड़ी के तख्त से उसे बाँधकर चारों तरफ आग जला दी,ताकि उसके अंदर मौत का खौफ पैदा हो। जल्लाद जोर से चिल्लाया-“गैलेलियो!तुम बच सकते हो,कह दो कि तुमने अभी तक झूठ बोला था,कह दो कि धरती घूम नहीं रही है।”गैलेलियो मुस्कुराया-“मेरे या तुम्हारे कहने से सच नहीं बदल जायेगा,धरती घूमना बंद नहीं कर देगी,इट स्टिल मूव्स,यह अब भी घूम रही है।”

इट स्टिल मूव्स, यह अब भी घूम रही है कहीं पर स्वर्ण अक्षरों में जड़ा हुआ आज भी सच का सामना न करने वालों का मुँह चिढ़ाता हुआ दिखाई पड़ता है।अफसोस इस बात का है इस सच को स्वीकार करने में सदियां लग गईं,जबकि झूठ तुरन्त स्वीकारा जाता है।निसंदेह झूठ बड़ी तेजी से फैलता है,गलत हैं वे लोग जो कहते हैं कि झूठ के पाँव नहीं होते हैं बल्कि कुछ ज्यादा ही होते हैं जो वह इतनी तेजी से दौड़ता हुआ हम तक पहुंच जाता है।शायद उसके साथ गढ़ी हुई गाथाएं ही हमें लुभाती हैं,अपनी ओर खींचती हैं।

90का दशक बेहद उथल पुथल का दौर था,वहीं पाकिस्तानी गायक अताउल्लाह खान बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे।पान के टपरों से लेकर घरों में उन्हीं की दर्द भरी आवाज गूँजती हुई सुनाई देती थी।हरेक उनका मुरीद हुआ जा रहा था।उनके बारे में एक किस्सा बड़े जबरदस्त तरीके से फैलाया गया,आपने भी शायद सुना होगा कि उन्होंने किसी लड़की को,उसकी बेवफाई पर रुसवा होकर मार डाला,मृत्युदंड की सजा हुई,सारे गाने जेल की सलाखों के भीतर से ही गाये हुए हैं….।सुनाने वाले का गला भर आता था और यह सुनकर हर किसी का इम्प्रेस होना लाजिमी था और गानों के बोल भी कुछ ऐसे रचे थे कि पक्का यकीन हो जाता था कि वाकई में यह कोई सत्य घटना है।

लेकिन आज इन्हें आसानी से मोबाइल पर सर्च किया जा सकता है।सारा झूठ बेनकाब हो जाएगा कि यह अभी भी जिंदा है और यह पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के मशहूर फॉक सिंगर हैं।इनके बारे में फैलाई गई सारी बातें गलत हैं,झूठी हैं।एक बात तो है,झूठ बड़ी तेजी से अपना काम करता है।अवसर का लाभ उठाकर,गुलशन कुमार ने तो पूरी बेवफा सनम नाम की फ़िल्म ही बना डाली। वास्तव में झूठ अपनी अंतिम सांस तक बिकता है,सच को अपनी कड़वाहट की वजह से न पहले कोई खरीदार मिले हैं,और न आज मिल रहे हैं।

अभी हाल ही में फ़िल्म कलाकार सुशांत सिंह की आत्महत्या ने एक बार फिर मौका दे दिया फ़साने गढ़ने रचने वालों को।न जाने कैसे कैसे किस्से हमने सुने और दूसरों को सुनाए।यकीनन आधुनिक युग में जब हरेक के पास इंटरनेट हो ऐसे में झूठ बोलना और उसे स्थापित कर पाना किसी बाजीगरी से कम नहीं है। वैसे झूठ अपने आप तो फैलता नहीं है,चलो मान लिया कि उसके पैर नहीं होते है,पर यह यकीन के साथ कह सकते हैं कि वह दौड़ता हमारे ही पैरों से है। इसीलिये चलते चलते धर्मवीर भारती को सुनना जरूरी है,जो कहते हैं-“हम सब के दामन पर दाग है, हम सब की आत्मा में झूठ है,हम सब के माथे पर शर्म है,हम सब के हाथों में टूटी तलवारें हैं।”

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं, जागरण डॉटकॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।

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