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मैं भारत हूं (कविता)

Parivartan- Ek Lakshya

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मैं भारत हूं
मेरे धवल् आँचल में
टांके हैं तुमने
इतने अनमोल रत्न
कि निरख निरख
इनकी अतुल्य आभा
मुखरित होता है मन
” मेरे हृदय के –
सौंदर्य तुम हो “।

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