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प्रेम की परिभाषा….

Parivartan- Ek Lakshya

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मन ही तो है,
कुछ भी कह जाता है,
तुम पर गुरूर है,
हठ में बह जाता है।
कैसा है ? क्या है ?
जब पूछता है कोई,
मुँह को सिल लेता है,
पलकों से बह जाता है,
जानते हो क्यों !
क्योंकि……
वो नहीं जानता,
प्रेम की परिभाषा।

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