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ये क्या हो ‘रिया’ है

मेरे बोल

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कोरोना संक्रमण से प्रभावित लोगों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। वैक्सीन बनाने के लिए दुनिया भर की सरकारें और बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ लगी हुई हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होना है। डोनाल्ड ट्रम्प और जो बिडेन में वाणी युद्ध चल रहा है। अमेरिका में नेताओं के निजी रहस्यों के पर्दाफाश का समय आ रहा है। दुनिया भर में मंदी की जबरदस्त लहर है। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में भी बड़ी बेरोजगारी है।

कोरोना की वजह से उधोग जगत में वीरानी है। कल-कारखाने बंद से ही हैं या जैसे-तैसे चलाये जा रहे हैं। काम के अभाव में बेरोजगार लोग मानसिक अवसाद के शिकार हो रहे हैं। घरों में बंद बच्चे चिड़चिड़े और मोटे हो रहे हैं। माएँ खाना बनाने और बच्चों को संभालने से  परेशान हैं। घर में बैठे बच्चों ने लड़-लड़कर नाक में दम कर रखा है। गरीबों को दो जून की रोटी के लाले पड़े हुए हैं।

चीन भारत की सीमा पर कभी इधर तो कभी उधर घुसपैठ की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान आतंकवादियों को घुसाने की कोशिश कर रहा है। अपने बिहार में चुनाव है। बेरोजगारी के डर से नीतीश बाबू ,सुशील मोदी ,लालू के लाल ,पासवान के चिराग इस कोरोना काल में भी दर-दर भटकने को तैयार हैं।

पर इतने सारे खबरी मसाले के बावजूद अपने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के उच्च कोटि के कई चैनल एक  ‘रिया’ के पीछे पड़े हुए हैं । माना कि सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिलना ही चाहिए और उनको न्याय दिलाने में मीडिया जगत की अपनी भूमिका हो सकती है। पर ये क्या है कि कई चैनलों के पास सिर्फ यही काम है। दिन भर रिया का ड्रग्स कनेक्शन, रिया की पल-पल की पूछताछ की खबर, रिया कहाँ पहुंची, रिया को जेल, रिया को बेल, उसने खाया या नहीं खाया, वह सोई या नहीं।

सुबह से शाम तक रिया रिया रिया …… अरे भाई अब कुछ काम जाँच एजेंसियों को करने दो ना। सभी कुछ आप ही कर दोगे तो इन एजेंसियां को भी बेरोजगार कर दोगे क्या? कई मीडिया चैनल तो दावे के साथ कहते हैं कि जो हमने वो ढूंढ के निकाला वो किसी के पास नहीं। हमारा चैनल वहां तक पहुँच गया जहाँ तक परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इनका बस चलेगा तो मुक़दमे का फैसला भी खुद ही कर देंगे और सजा की घोषणा भी इन्हीं के द्वारा और इन्हीं के चैनल पर होगी।

पुलिस, वकील, जज सभी को बेरोजगार करने की तैयारी है। लोग इस उम्मीद में टीवी के पास बैठते हैं कि कुछ अच्छी खबर मिलेगी। कोरोना की वैक्सीन बनने की खबर मिलेगी। बेरोजगार को रोजगार की खबर मिलेगी। बच्चों को स्कूल खुलने की खबर मिलेगी। एक जगह से दूसरी जाने के लिए बेकरार को ट्रेन ,बस की खबर मिलेगी। मजदूर,गरीब को मजदूरी और रोटी की खबर मिलेगी। पर टीवी खोलते ही रिया रिया रिया……. आपकी समझ में कुछ आ रहा है? भई अपनी समझ में तो कुछ नहीं आ रिया है।

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी आंकड़े या दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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