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रिश्‍तों की चुभन

bhatnagar

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लोगों के विचार से वह मामूली नाकनक्श वाली औरत थी, पर उसके लिए वह दुनिया की सबसे सुंदर औरत थी, हैं और रहेंगी। जीवन की समस्त समस्याओं के बावजूद उसका मुस्काता चेहरा, उसका आत्मविश्वास गज़ब का था| उसकी उम्र ज्यादा नहीं थी किंतु समय ने उसका अधेड़ और लचर बना दिया और वह 35 साल की उम्र में 60 वर्ष की दिखता थी |

मुझे याद आता है कि उसके पास सिर्फ दो ही साड़ी थी और वह भी इतनी पुरानी हो चुके थी की एक सी लगती थी उसमें अंतर करना मुश्किल था। |उसमें गज़ब का आत्मविश्वास था और उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा उस को दूसरों से अलग करता था।  यही कारण था की तमाम परेशानी के बावजूद उसने अपने लाल को पढ़ने के लिए शहर भेजा| वह एक छोटे गांव की रहने वाली औरत थी और उसके पास सामान के नाम पर 2 या 3 मिट्टी के बर्तन थे|

उसके गांव से शहर जाने का किराया एक रुपया था| वह अनाज की बोरी को उठा कर पूरे गांव में घूमती और आवाज देती और अनाज बेचने की कोशिश करती या लोगों से विनती करती कोई उस को एक रुपये उधार दे दे ताकि उसका लाल शहर जा सके। उसका बेटा उसकी परेशानी से अनजान नहीं था और अपनी मां की सेवा करना चाहता था।उनका यह काम चार साल तक चलता रहा अचानक काल ने उसकी मां को छीन लिया और बे काल में समा गयी और काल के हाथ मजबूर होकर रह गई|

आज उसका बेटा बहुत बड़ा अफसर हैं। ऐशो आराम से रहने की हर चीज उसके पास है। लेकिन कुछ है जो चुभता है। अपनी मां के एक रुपये मांगने को आज तक भूल नहीं पाया है। आज उसका बेटा 60 वर्ष का हो गया है। लेकिन उसकी यह चुभन आज भी बरकरार है।

अशोक कुमार भटनागर
रिटायर वरिष्ठ लेखा अधिकारी
रक्षा लेखा विभाग , भारत सरकार

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