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बस कहानी रह जाती है।

चंद लहरें

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श्रीमती सुषमा स्वराज का अनन्त की ओर दिव्य प्रयाण इस बात काप्रमाण है किसंसार में चाहे कोई भी किसी रूप में अपने को प्रतिस्थापित कर ले, एक उत्कृष्ट चरित्र के रूप में अथवा एक निकृष्ट चरित्र के रूप में ,एक क्षण ऐसा आता है कि कुछ नहीं रह जाता।,एक कुशलवक्ता, एक सम्पूर्ण रूप में सक्षम राजनेता, एक अत्यंत प्रभावी व्यक्तित्व,एक समर्पित राजनीतिक कार्यकर्ता,जिसने जीवन में कुछ आदर्शों का लक्ष्यपाला,उसे पूर्ण करने के  लिए देश और दुनिया मे अपने व्यक्तित्व की सारी शक्ति लगा दी,मानवता की सेवा में जीवन अर्पित किया, जीवन के अंतिम क्षणों के कुछ ही पूर्व राजनैतिक  जीवन की एक बहुत बड़ी मनोकामना को पूर्ण होते भी देख लिया ,खुशी से लबालब भर गयीं और खुशी के इन क्षणों को अभिव्यक्त भी किया पर हृदयाघात ने शायद इतनी ही छूट दी थी।वे इस दुनिया को छोड़कर चली गयीं।अभी तो राष्ट्र ने जम्मू कश्मीर की धारा370 से मुक्ति को जीना आरम्भ भी नहीं किया था, प्रतिक्रियाएँ बाहर खड़ीं इंतजार ही कर रही थीं कि देश को अपना एक नगीना खो देना पड़ा।

भारतीय राजनीति का वह अवश्य ही गौरवशाली अध्याय था, जिसमें श्रीमती सुषमा स्वराज नेदेश और विदेश में अपनी साख बनायी,अपने सिद्धांतों के लिये जिया,वह व्यक्तित्व भारत के विदेश मंत्री के रुप में सर्वत्र जाना पहचाना जा सकता है।यह व्यक्तित्व का चरमोत्कर्ष  था।

ऊँचे से ऊँचे पद पर पहुँचकरभी  ,देश या देश के बाहर भीएभातीय महिला केगौरव शाली स्वरूप को बनाए रखना य ह उनकी विशेषता रही।व्यवहार में शालीनता,वाणी मे माधुर्य  वेषभूषा मे भारतीय गरिमा उनकी पहचान रही। सम्पूर्ण रूप से भारतीय।

वह राजनीति में कैसे आयीं ,विदेश मंत्री के शिखर तक का उनका आरोहण , एक विशिष्ट व्यक्ति की विशिष्ट जीवन कथा है ही किन्तु सुषमा स्वराज की विशिष्टता उनकी सशक्त नारी छवि मे रहीजिसने नारी सशक्तिकरण को एक भारतीय दिशा दी। बताया कि वे अपनी विशिष्ट पहचान का झंडा  कहीं भी गाड़ सकती हैं।

उनके माथे की लाल बिन्दी मात्र उनके सौभाग्य की ही पहचान नही थी बल्कि    भारतीय संस्कृति के सम्मान का एक उदाहरण प्रस्तुत करती थी।यह उनके भारतीय सास्कृतिक छवि की पहचान थी।

मात्र यही नहीं,अपने सशक्त स्वरों में दुनिया के    विशिष्ट मंचों पर देश और विश्व की ज्वलंत समस्याओं से दुनिका को रूबरू कराने का कार्य शानदार तरीके से किया।आतंकियों की सहायता कर हमारी गृह समस्याओं को जटिल बनाने का कार्य पाकिस्तान ने किया है , इस तथ्य को बार बार बेनकाब करती रहीं। उनकी वाक्पटुता स्पष्टता और निडरता ने विश्व समुदाय को प्रभावित किया।

यह नहीं कहा जा सकता कि अन्य किसी भारतीय महिला ने ऐसा नहीं किया ,पर सुषमा स्वराज की तत्सम्बन्धित प्रासंगिकता को नकारा नहीं जा सकता।

यह देश के भाग्य की विडम्बना ही कही जाएगी देश जम्मू कश्मीर की धारा 370 से आजादी की खुशीमनाने से रह गयाहै। उसकी एक प्रिय नेता के आकस्मिक निधन ने उसे शोक मेंडुबो दिया है।

अब सुषमा स्वराज  स्मृतियों में रहेंगी।संसद में बहस करती,यू एन में भाषण देतीं,हिन्दी भाषा को विश्व मे प्रतिस्थापित करती हुईं सुषमा ,जम्मू कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष को नकारती हुई सुषमा,पाकिस्तान की जेल में बन्द कुलभूषणजाधव को मुक्ति की आशा देती हुई सुषमा,और न जाने कितने स्वरूपों में।

सुषमा याद की जाएँगी, यादकी जानी चाहिए। यही उनके प्रति आखिरी श्रद्धाँजलि होगी।कुछ नहीं रह जाता, बस यादों में एक कहानी रह जाती है।

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आशा सहाय –7–8–2019   ।

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