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स्वप्न -विकास बजट–2019

चंद लहरें

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एक सामान्य नागरिक की हैसियत से बजट 2019  , भाजपा के दूसरे शासनकाल के प्रथम बजट  को प्रस्तुत करते देखा ,समझने की कोशिश की तो लगाकि यह भाजपा की कल्पनात्मक ऊँचाईयों कीएक रूपरेखा है साथ ही विरोधियों की सदाहरित आलोचनाओं को उत्तर देने की एक कोशिश।   विश्वपटल पर अन्य विकसित देशों की समकक्षता हासिल करने का स्वप्न प्रयास।और अगर बजट में घोषित सारे सकल्प  अपने रचनात्मक स्वरूप में जमीन पर आकार ग्रहण कर लें तो स्वयं ही नये भारत का जन्म हो जायगा।पर अभी यानि वर्तमान में बहुत सारी बातें चौंकाती हैंऔर मन में प्रश्न उठता है कि बजट निर्माताओं ने  वर्तमान की अवहेलना क्यों कर दी! क्या उन्होंने यह मान लिया कि वर्तमान की स्थिति से भारतीय नागरिक पूर्णतया संतुष्ट हैं!

देश अभी भी असन्तुष्ट है।रोजगार क लेकर,नित्य के निर्वाह के लिए ट्रोल डीजल, घरेलु गैस आदि के मूल्यों मेंबढ़ोतरी को लेकर । ग्रामीण रोजगार और निम्न और निम्न  मध्य वर्ग की वाहन सुविधा बाधित होगी।उनके अपने से ऊँचे स्तर के जीवन यापन के स्वप्न की पूर्ति में ये बाधाएँहोंगी।क्या ये संभव है कि  गाँवों , कस्बों,छोटे शहरों में ट्रेकर, ऑटो,छोटी बसें चलाकर रोजगार जुटानेवाले इससे परेशान नहीं होंगे?और वह जनता जो दिन प्रतिदिन इन्हीं के सहारे काम करती है,उनका क्या ? और इसके परिणामस्वरूप वस्तुओं के मूल्य में जो वृद्धि अनायास हो जायगी–तो यह सब वर्तमानकी समस्याएँ हों गी। वैसे भी यह तबका सदैव राष्ट्र के विकास के लिए अथवा अन्तर्राष्ट्रीय जगत मे उसकी विशिष्ट छवि और साख बनाए रखने के लिए सबकुछ कुर्बान करने को तैयार ही रहती है।सबसे बड़ा टैक्सपेयर , जिम्मेदार नागरिक, और मुँह बन्द कर सब सहने वाला भी यही तबका है।

निर्मला सीतारमण ने देश की वाह्य सुरक्षा केक्षेत्र से आन्तरिक विकास की व्यवस्था के क्षेत्र में पदार्पण किया हैऔर वित्त मंत्री के रूप में देश का 2019 का बजट पेशकिया है।..उन्होंने अतः इमानदार उन टैक्सपेयर्स जनता का आभार व्यक्त किया है, जिनके पैसों के बल पर देश केविकास का स्वप्न देखा जा सकता है।निश्चय ही यह बजट मात्र उनके द्वारा निर्मित नहीं,और जैसा कि स्पष्ट किया है,देश की समस्त जनता की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है,पर इसपर उनके व्यक्तित्व की छाप अवश्य है।एक सशक्त महिला ने हर क्षेत्र में महिलाओं के लिए मार्ग खोलने की कोशिश की है।अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए एक समिति के गठन का प्रस्ताव लाया है।हर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण  का मार्ग प्रशस्त किया है।।उनको अपने विकास के लिए स्वयं मार्ग बनाने की भी प्रेरणा  दी है।उनमे लीडरशिप की प्रेरणा देने एवंआत्म विश्वास भरने के लिए पाँच हजार का ओवर ड्राफ्ट एवम लीडर को एक लाख का कर्ज का प्रस्ताव ग्रामीण महिलाओं के विकास के लिए अच्छी शुरुआत है। स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूह के लिए इससे बढ़ावा मिलेगा।सुरक्षा के लिए निर्धारित मद में कटौती कर भी उनमें शक्ति भरने का ही कार्य किया है।

यह बजट निश्चित रूप से मुख्यतः गाँव गरीब और किसानके लिए ही है।गृह निर्माण, कुकिंग गैस की सभी को सुविधा, घर घर में बिजली और नल ,किसानों को उनके उत्पादन के उचित मूल्य देने की व्यवस्था करनाऔर उन्हें ऊर्जा उत्पादक बनाने के लिए कई योजनाएँ चलाने का वादा उन्हें अच्छे स्वप्न दिखाने जैसा है। पर प्रश्न है कि इससे किस श्रेणी  के किसान लाभान्वित होंगे, क्या मध्यमऔर छोटे किसानों पर इसका प्रभाव पड़ेगा?उत्तर अभी भविष्य के गर्भ में है।

छोटे उद्यमियों और दुकानदारों को पेंशन देने की योजना सराहणीय है।तीन करोड़ ऐसे लोग लाभान्वित होंगे।प्रधानमंत्री कर्मयोगी मानधन योजना की यह पहल प्न.मंत्री की समग्र कल्याण दृष्टि की ओर इंगित करती है।

जैसा कि मूल रूप से यह बजट विकास से जुड़ा है, गाँवों के विकास के लिए मजबूत सड़कों का होना जो घर घर को मुख्य सड़क से जोड़ सके, की अनिवार्यताकी अनदेखी नहीं की जा सकती। यह उसके विकास की पहली शर्त है।इस सन्दर्भ में किए गये ठोस कदमों की स्पष्ट जानकारी नहीं हो सकी इतना स्पष्ट किया गया कि कार्य और आगे बढ़ेगा।गीँवों को भी सुच्चिक्किणता की आवश्यकता है,प्रगति अभी भी धीमी है।

शिक्षा के क्षेत्र मेंदेश को विश्व को शिक्षा हब बनाने कीकल्पना है,यह अच्छी बात है।हमारी आँखों के सामनेपुनः नालन्दा विश्वविद्यालय का स्वरूप उभरआता है,। यह एक गौरवशाली योजना होगी विदेशी छात्रों यह आकर्षित करेगी।अध्ययनप्रिय पढ़े लिखे लोगों  मे भारत के इस स्वरूप की कल्पना सुखद लगेगी । भारतीय युवकों को बाहर जाकर अध्ययन करने की प्रवृति पर थोड़ी लगाम लग सकेगी। प्रश्न फिर भी शेष है कि उन युवकों का क्या होगा जिन्हें अभी पढ़ने और नौकरी के लिए विदेशों का मुँह जोहना पड़ रहा है।यह वर्तमान की समस्या है।उनकी प्रतिभा यहाँ कुंठित हो रही है।क्या नौकरी करना और अच्छे जीवनयापन के लिए विदेश जाना और वहीं बस जाना मध्यम वर्ग के युवाओं का हश्र बन जाएगा?क्या देश और विदेश में विदेशी कम्पनियों के नौकरी के भरोसे रहना होगा।?बजट में इसका उत्तर है स्टार्ट अप।युवाओं को स्टार्ट अप की ओर खींचने के लिए पृथक टी .वी.लॉन्च किया जायेगा।  इसके अतिरिक्त कि घर बेचकर स्टार्ट अप करने पर टैक्स आदि में अधिक सुविधाएँ मिलेगी।  यह भी तर्क है कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से रोजगार उत्पन्न होंगे। यह काल्पनिक योजना है । साधारण लोगों को अपील नहीं करती।हवाई सी प्रतीत होती है।मोदी सरकार का यह बजट भी इस दिशा में कुछ ठोस करने में असमर्थ है। देश के नौजवानों को अपने बल बूतेही अपने पैरों पर ख़ड़ा होना सीखना होगा।

यह अवश्य ही विकास का बजट है।प्रदूषण और पेट्रोल डीजल को दृष्टिपथ मे रखते हुए ई वाहनों को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है।इलेक्ट्रिक कारों के उपयोग पर कर की छूट।ये कारें बन रही हैं पर महँगी है। सारी मार उन बुजुर्गों पर है जिनके पास पेट्रोल डीजल कारें है और जो इन्हें बेचकर दूसरी कार खरीदने की हिम्मत नहीं कर सकते।क्या पेट्रोल की बढ़ती कीमतें उनमें बेचैनी नहीं भरेगी, क्या उनके जीवन स्तर में उतार नहीं ले आएगी?

स्टेशनों का कायाकल्प आवश्यक हैताकि हर तरह के यात्रियों को सुविधा हो सके । कुली पैटर्न पर निर्भर नहीं रहना पड़े।प्राइवेट ट्रेनों का चलना भी एक अच्छी योजना है।यात्रियों का भार बँट सकेगा और रेलवे सर्विस को एक स्वस्थ प्रतियगिता भी मिलेगी।

देश में इसरो की तरह और भारतीयअंतरिक्ष संगठन की तरह न्यू स्पेस इंडिया को इन कारपोरेट किया गया है। उसके कार्यक्रम उद्योग का स्वरूप ग्रहण करेंयह दे के विकास और अंतरिक्ष में बढ़ते उसके कदमों को बढ़ावा देना और एक विकसित अंतरिक्ष शक्ति के रुप मे  भारत को प्रतिस्थापित करने की विशद योजना है।यह देश कोअवश्य ही गौरवान्वित करेगी।

यह सही है कि बजट देश के विकास  की स्वप्न -यात्रा  पर ले जा रहा है। पर ये सारे लक्ष्य पूरी इमानदारी से सही समय पर पूरे हों तो—।

हमें लगता है कि अभी भी ग्रामीण जनता  देश के बजट से और आगे बढ़ने और समृद्ध होने के रास्ते खोज रही है।स्टार्ट अप की योजनाओं ने गाँव के बेरोजगारों को सही ढंग से स्पर्श नहीं किया है।

सफाई की योजनाओं से जुड़े  सार्वजनिक शौचालयों मे कर्मचारी वर्ग की व्यवस्था आवश्यक है।अन्यथा उनके बन्द दरवाजे योजना की सफलता की गारंटी नहीं दे सकते।अधूरे कार्यों  को पूरा सरने की प्राथमिकता होनी चाहिये ।मध्यम वर्ग के आयकरों  में कोई परिवर्तन किए बिना उच्च आय वर्ग के आयकरों में बढ़ोतरी कर देना थोड़ा सन्तोष अवश्य देता है। साथ ही, विरोधियों का मुख भी बन्द करता है।

कुल मिलाकर बजट उड़ान की बड़ी उछाल है। लगता है वर्तमान सरकार पूर्ण आश्वस्त है अतः अपने देश के लिए इन सपनों को देखने की कोशिश कर रहा है।जो विश्व पटल पर उसे नयी पहचान दे सके।

————–आशा सहाय —8-7-19 –।

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