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बजट -2018—मेरी दृष्टि से।

चंद लहरें

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सरकार के पास सिर्फ एक वर्ष का समय है।अपेक्षा की जा रही थी कि लोक लुभावन बजट के द्वारा वह अपने मतदाताओं को लुभाने काकार्य अवश्य करेगी । न ही अपेक्षा गलत थी और न बजट के प्रयासों ने इसमें कोई बाधा उत्पन्न की।वस्तुतः सरकार की दूरदर्शिता ने किसी को निराश नहीं किया।अबतक की कोशिशें जिस कार्य को नही कर पा रही थीं वहाँ तक सरकार ने नयी दृष्टि से देखने की कोशिश की  , यह बड़ी उपलब्धि है।बजट आने से  पूर्व जिस  घोषणा पर नौकरीपेशा और मध्यवर्गीय नागरिक की दृष्टि गड़ी रहती हैवह आयकर की छूटों पर। व्यक्तिगत छूटों मे कोई वृद्धि न करते हुए सरकार ने यहाँ अपनी दृढनिश्चयता का परिचय दिया।यह वह क्षेत्र है जिसपर वह पिछले वर्ष विचार कर चुकी है।.
जैसी कि वास्तविक समस्याएँ हैं समाज का एक खास वर्ग जिसका देश के आर्थिक विकास में विशिष्ट योगदान है,जिस ओर बार बार ऊँगली उठायी जाती रही है वह कृषकों का है, और सरकार ने इस बार उनकी समस्याओं पर दूरदर्शितापूर्वक ध्यान देने की कोशिश की है।ऐसी स्थिति में भी जब उपज पर्याप्त होती हो, उन्हे  लाभ नहीं होता, लागत मूल्य तक उपलब्ध नहीं हो पाता,तो सन् 2020 तक आमदनी  दुगुनी करने का दावा खोखला प्रतीत होता है, सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाए जो निश्चित ही उन्हें कुछ हद तक आश्वस्त कर सकेंगे।खरीफ फसल के मिनिमम सपोर्ट मूल्य में 1.5 यानि डेढ गुने की बढोतरी करउन्हें तुष्ट करने की कोशिश की है। सरकार उनकी समस्याओं से अवगत हैअतःकृषि उत्पाद केनिर्यात मेंउनहें बढावा देतेहुए100बिलियन डॉलर तक के निर्यात की अनुमति देने की घोषणा  की   है।उनके अनुसार यह मुद्दा बहुत दिनों से स्थगित था।यह उनकी आय मे वृद्धि के लिए उठाया ठोस कदम प्रतीत होता है पर इस बात पर निर्भर करता है कि इसका लाभ कितने प्रतिशत कृषकों, किन वर्गों के कृषकों को किस प्रकार मिल सकता है कि लाभान्वित हो वे- अन्याय और अनदेखी सम्बन्धी अपनी शिकायतें कम कर सकें।सब कुछ व्यावहारिक कार्यान्विति पर निर्भर करता है जिसके लिए कम अवधि में अधिक सचेष्ट होने की आवश्यकता है।

गरीबों की स्वास्थ्य सम्बन्धी   समस्याओं पर ध्यान देकर औरसामान्य जन की स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं कोसमझते हुए नये अस्पतालों औरअधिक मेडिकल कालेज खोलने का जो निर्णय लिया है वर्तमान और भविष्य के समय की माँग है।ओबामाकेयर के तर्ज पर नामोकेयर के जरिये गरीबों के 100मिलियन से अधिक लोगों की मदद करनी चाही है।बुजुर्गों के मेडिकल इन्वेस्टमेंट के 40000 रुपयों को 80 डी के अन्तरगत टैक्स फ्री करदेना सरकार की उस  दृष्टि की परिचायक हैजिसमें मेडिकल एड के नाम परउनके द्वारा खर्च किए पैसे उनपर  भारी पड़ते हैं। इसी तरह बुजुर्गों के जमा किए गए पैसे परमिले व्याज की 40000 राशि को टैक्स फ्री करना एक अच्छा निर्णय है यह कदम बहुत पूर्व उठाना चाहिए था।

वैसे सामान जिससे जीवन स्तर में सुधार की संभावना है,औरजो विकासस के लिए आवश्यक है ,के मूल्यों मे कमी करजेवर गहनों ,विलासिता से सम्बन्धित वस्तुओं के मूल्य मेवृद्धि कर  एक अच्छी सोच का परिचय  दिया है। वर्गभेद में कमी और मेक  इन इन्डिया को बढ़ावा   देने के लिए स्मार्ट फोन जैसी आयातित वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी बढा देना  एक बहुत उचित कदम है।

एक महत्वपूर्ण निर्णय जो सरकार ने प्रदूषण को दृष्टिपथ में लेकर  लिया हैवह सभी तरह से स्तुत्य होना चाहिए। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब केपाल्यूशन संकट जिससे सम्पूर्ण दिल्ली आहत होती है, जनजीवन अस्तव्यस्त हो जाता है,सेनिबटने ,खेती के अवशेषों के उचित प्रबंधन हेतु  मदद करने की योजना है। प्रश्न अभी शेष है कि इसका क्रियान्वयन किस प्रकार होता  है।

गरीबों और किसानों केलिए बीमा राशि और ऋण राशि मे वृद्धि कर उनकी मदद करनी चाही है परर यह बहुतबड़ा मुद्दा हा है जिसे विपक्ष अपने हाथों से कभी छूटने नहीं देगा और हर दृष्टि से उसे अपर्याप्त ही करार देगा। यह विपक्ष राग है इसे वह सदैव सुनाने को प्रस्तुत रहेगा।

पिछड़े जनजातीय लोगों के लिए पृथक विद्यालय स्वरूप  एकलव्य विद्यालयों  को विकसित करने की योजना बनायी है ,ताकि उन्हें शिक्षा की ओर उन्मुख किया जा सके और सामान्य मुख्यधारा में लाने की उनकी पीठिका तैयार की जासके, एक प्रभावी कोशिश हो सकती है।वे लाख प्रयत्नों के बाद भी सामान्य विद्यालयों से जुड़ना नहीं चाहते।देखना है कि इस योजना का कार्यान्वयन सरकार कितने मनोबल से कर सकती है।

विरोधी पक्षों की दृष्टि रोजगार उपलब्ध कराने की ओर अवश्य आलोचनात्मक होगी ही।पर यह भी सचहै कि स्वरोजगार की ओर मानसिकता को उन्मुख करना आवश्यक है।सरकारी नौकरियाँ सभी नहीं पा सकते।प्राईवेट क्षेत्रों में नौकरियों की बाढ़ नही  ही आ सकती। हाथों की बजाय मशीनों को जब हम नौकरियाँ दे रहे हैं,जिसपर देश का विकास निर्भर है,  तो रोजगार सृष्टि कार्यालयों मे नहीं के बराबर हो सकती।पर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु बिना किसी गारंटी के भी ऋण उपलब्ध कराना,एक प्रेरक और सहानुभूतिपूर्ण कदम के रूप में सराहा जाना चाहिए।

जैसाकि प्रधानमंत्री ने एक टी ,वी, चैनल को दिए इन्टरव्यू के दौरान कहा कि एक साधारण सी दुकान खोल कर एक बेरोजगार अगर शाम तक 200 –रूपये कमा लेता हैतो वह उसके रोजगार के रूप मे देखा जाएगा।पर यह हर स्तर के रोजगार आकांक्षी के लिए सही नहीं हो सकता।प्रत्येक व्यक्ति केरोजगार के लिए स्किल डेवलपमेंट की आवश्यकता है। इसकी सुविधा उपलब्ध कराकर प्रतियोगिता की भावना विकसित करने की आवश्यकता होगी। गरीब घरों की महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना का और विकास करना और सिलंडरों के सही वितरण की व्यवस्था उनके हित में पुनः एक अच्छा कदम है।

कुल मिलाकर सरकार के दृष्टिपथ में सबका विकास है । सबों को उसके मनोनुकूल तुष्ट कर देना तो कठिन है नहींनपूरा किये जाने वाले वायदे न किए जाएँ तो अच्छा है। कुछ राज्य नाराज हो सकते हैं कुछ विदेश में रहने वाले लोग भी जो अपनी पूँजी देश के विकास में लगा रहे –हैं पर नाराजी कम, संतोष ज्यादा है।

फिर भी ,सबको सन्तुष्ट करने का प्रयास सराहनीय है।निकट भविष्य में होनेवाले चुनावों में भी यह सुपरिणाम देने वाला भी हो सकता है।सरकार जानती है कि बजट के नाम पर देश को अब झुनझुना नहीं दिया जा सकता। किसी चमत्कार की सृष्टि भी नहीं की जा  सकती।ऐसी स्थिति में विकास की दूरदृष्टि ही कारगर हो सकती है।

इस बजट कीप्रशंसा जब देश विदेश के अर्थशास्त्री कर रहे हैं तो इसे विपक्ष  की नजर से न  देख विकास की नजरों से देखना ही उचित होगा।

सब कुछ सही तभी हो सकता है जब उसका कार्यान्वयन  भी उतनी ही  गम्भीरता से हो।सिद्धान्त रूप से यह बजट दूरदर्शी एवं सुपरिणाम देने वाला हो सकता है।

आशा सहाय 3-2-2018

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