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आत्मा मुक्त

anuj sharma

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“हेलो राजीव जल्दी आओ तुम्हारी माताजी की तबीयत बहुत खराब है डॉक्टर ने जवाब दे दिया है” पड़ोस की आंटी ने राजीव को बताया राजीव ने तुरंत नियति को पैकिंग करने को कहा उसे बिना बताए, लेकिन नियति को बार बार पूछने पर उसने बता दियामम्मी की तबीयत बहुत खराब है, डॉक्टर से जवाब दे दिया है” इतना सुनते ही नियति की हालत खराब होने लगी फिर राजीव ने उसे संभाला और गाड़ी निकाल कर दोनों चल पड़े ।
सफर छह-सात घंटे का था नियति लगातार रोते जा रही थी क्योंकि अपनी मां से ज्यादा प्यार दिया था उसकी सासू माँ ने।
उसके मन में सारे सीन उसकी आंखों के सामने घूमने लगे, जब वह घर में आई थी बहू बनकर, तो बहुत सारे मन में सवाल उठे थे, जिसने शादी कराई थी उसने भी कहा था कि सास प्रिंसिपल रही हैं तेरी,संभल कर रहना बहुत तेज हैं, फिर पहली रसोई बनाने में उसके हाथ पैर कांप रहे थे ,आँगन में बैठे रिश्तेदार नई बहू के हाथ का खाने का इंतजार कर रहे थे ,उधर नियति जैसे तैसे किचन में पहुंची हालांकि बहुत अच्छा जानती थी खाना बनाना लेकिन नर्वस बहुत थी।
उसी डर से बर्तन छूट कर उसके हाथ से गिरा तो और डर गई ,उसकी सासू मां आई उसकी हालत देखकर सर पर हाथ फेरा और कहा
“बेटी डर मत एक काम कर तू बाहर आ” फिर सारा खाना खुद बनाकर नियति से कहा” बेटी अब तू बस खाने को एक बार हाथ लगा दे ,हो गया नेग और पूरी जिंदगी पड़ी है तेरे हाथ का खाने को”
इतना सुनकर नियति के मन का डर उड़ गया और वह सासु माँ के गले लग गई
“चल बस बस अब खाना परोस दे सब भुखिया रहे खाने को “
उसकी सासु माँ ने कहा
खुशी खुशी सबको खाना खिलाया सबने तारीफ की नियति की।
जीवन के हर मोड़ पर उसकी मदद करती थी उसकी सासु माँ ।
हर सुख दुख में साथ दिया था।
राजीव की आदत थी वह हर बात अपनी मम्मी से शेयर करता था नियति हमेशा माता जी के साथ काम में रहती थी ,फिर एक दिन साथ सासु माँ ने नियति से कहा
“बेटा जब राजीव आया करे तो तू उससे बात किया कर कब तक वह बच्चों की तरह मुझे ही सब बताता रहेगा ,मां का काम तो शादी तक संभालना होता है और फिर बहू ये जिम्मेदारी संभालती है और हम बूढ़े कब तक है
“अरे नहीं मम्मी जी आप ऐसे क्यों बोलती ,हम बच्चे हैं आपके ,आप से बात करके मन हल्का होता है “
नियति बोली
सासू मां मुस्कुराए और कहा
“अब तू संभाल अब मेरा तो हो गया बहुत “
उस दिन के बाद से राजीव और नियति का संबंध और भी गहरा होता गया ।
राजीव की जॉब दूसरे शहर में लगी लेकिन नियति ने मां के साथ रहने का निर्णय लिया, लेकिन उसकी सासू माँ ने नियति को कहा
“बेटी पराए देश में पत्नी का साथ होना बहुत जरूरी है ,आदमी लोग बहुत कम अपनी परेशानी बताते हैं, फिर फोन पर इतना नहीं खुलते ,तेरा होना जरूरी है मेरी चिंता मत कर मेड तो आती ही है,और मेरा सत्संग, मैं तो यह घर छोड़कर नहीं जाने वाली तेरे पापा की याद जो जुड़ी है घर से”
नियति फिर भी 6 महीने सासू मां के पास रही, फिर बहुत कहने पर राजीव के साथ गई दो बच्चे भी हो गए थे, हर दिन वीडियो कॉल पर मां के साथ बात करती ।
यह सारे सीन नियति के आगे चल ही रहे थे कि राजीव की आवाज कानों में पड़ी
“चलो नियति हॉस्पिटल आ गया”
नियति, राजीव भागकर बार्ड में पहुंचे मां के पास ,मां की आंखों में चमक आई और ऑक्सीजन माक्स हटाने का इशारा किया नर्स को, नियति और राजीव का रो-रोकर बुरा हाल था ।
दोनों के सर पर हाथ फेर कर बोली
“बेटा इस जन्म का सफर यहीं तक था और बहू अब तू संभाल सब, मुझे मुक्त कर इस दुनिया से “
नियति बोली
“मां जी आपके जैसा प्यार मुझे कहीं नहीं मिला है और आप कहीं नहीं जाओगे “
सासू मां के चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान दौड़ गई और सांस हमेशा के लिए थम गई।
आत्मा मुक्त
अनुज  की कलम से
(स्वरचित एवं मौलिक रचना )
डिस्कलेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।
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