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हनुमान का आगमन

Ajay Shrivastava's Blog

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ये कहानी त्रेतायुग से भी पूर्व की है जब अमृत मंथन हुआ था। अमृत मंथन के बाद जब भगवान शिव ने हलाहल विष का पान कर उसे कंठ में धारण कर लिया। इसके बाद अमृत निकला। भगवान विष्णु ने छल से देवगणों को अमृत का पान करवा दिया।

राक्षसों का कांजी यानी मदिरा मिली। इसी प्रकरण में दैत्यराज बलि के महाबली सेनापति राहू का शीश काट दिया गया। बलि को वामन के वरदान से पाताल लोक का राज्य मिला। सबकुछ कुशलता से पूर्ण हो गया। सब ओर खुशहाली छा गई। देवलोक में नित्य आनंदोत्सव मनने लगा।

सब ओर प्रसन्नता थी पर एक शक्ति अभी भी कष्ट की अग्रि में जल रही थी, तप रही थी और एक महान घटना घटित होने वाली थी।
क्या थी वो महान घटना? जानने के लिए दी गई लिंक पर आएं-
https://sanskarajayv4shrivastava.blogspot.com/2021/04/%20.html

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