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मां ने क्या सिखाया!

Anuradha Dhyani

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अक्सर सिम्मी को अपनी सास से सुनना पड़ता- ” तुम्हारी माँ ने कुछ नहीं सिखाया? ” पर चाह कर भी वो जवाब नहीं दे पाती क्योंकि माँ ने सिखाया था कि सास को जवाब मत देना. फिर वो ऐसी सुनने वाली अकेली नहीं थी. ऐसी बातें ऑफिस में भी सुनती रहती तो ये तो महिलाओं के जीवन में एक सामान्य बात ही है.

एक दिन ऑफिस से लौटते हुए सिम्मी का एक्सीडेंट हो गया. हाथ और पाँव दोनों में प्लास्टर चढ़ाना पड़ा. बेड रेस्ट अब मजबूरी थी . बेटा समर्थ अभी छोटा और सास भी ज्यादा काम नहीं कर पाती. सिम्मी भी अपनी किस्मत को कोस रही थी कि गिरी भी और चोट भी लगी तो दाए पैर और हाथ में.कभी-कभी ऐसी परेशानिया आ जाती है पर सब कुछ मैनेज करना पड़ता है.

किस रिश्तेदार को बुलाना सब तो अपने काम में बिजी है और वो खुद भी कहाँ जा पाते है. इतनी व्यस्त दिनचर्या और काम वाली बाई भी तुरंत कहाँ मिलती है. आस-पड़ोस में काम वाली बाई के लिए बोला तो पर उसकी जगह पर पूरे समय के लिए काम वाली बाई मिलना मुश्किल ही था. आज सुबह बेटे का नाश्ता नहीं बन पाया और ब्रेड जैम के साथ स्कूल चला गया. दो दिन ब्रेड, चावल दाल और ऑनलाइन खाना आर्डर के सहारे तो निकल गये. पर रात के खाने में समर्थ ने खिचड़ी खाने से मना कर दिया.

सिम्मी के पति ने अपने बेटे को डांट कर कहा- ” चुपचाप खा लो, मै बहुत थका हुआ हूँ और मुझसे यही बन सकता है. रोज- रोज बाहर का खाना भी तो अच्छा नहीं.बस दो दिन की बात है फिर एक आंटी को बोला है वो घर के सारे काम कर देगी.”

दादी ने भी अपने बेटे की बात का समर्थन किया तो समर्थ गुस्से में बोल पड़ा- ” पापा , क्या आपकी माँ ने आपको कुछ नहीं सिखाया? मनपसंद खाना तो बिलकुल नहीं. काश ! आपको अच्छा खाना बनाना आता. कल सुबह मेरे लिए हेलथी ब्रेकफास्ट होना चाहिए नहीं तो क्लास में मजाक बनेगा”

समर्थ के पिता को गुस्सा तो आया पर न जाने क्यों चुप ही रह गये…..डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठी दादी को शब्द बहुत चुभ रहे थे. “तुम्हारी माँ ने कुछ नहीं सिखाया ?” ये शब्द उसने भी अपनी सास से सुने थे और जाने -अनजाने अपनी बहु को भी बोलती रही पर आज अपने बेटे के लिए ये शब्द सुनकर न जाने उसको इतना क्यों दुःख हो रहा है.

अन्दर बिस्तर पर लेटी सिम्मी ने भी सब बातें सुनी. वो सामने होती तो शायद अब तक समर्थ को डांट लगा देती क्योंकि वो अपने पिता से इस तरह बात कर रहा था पर आज सब मौन थे. समर्थ की बात भी सही थी और उसने भी तो वही कहा जो वो हमेशा देखता और सुनता आया.
” तुम्हारी माँ ने तुम्हे कुछ नहीं सिखाया? ”

अनुराधा नौटियाल ध्यानी

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावा या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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