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कहाँ गये जनता के सेवक

मेरी कलम से
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इस समय देश पर कोरोना का संकट आया हुआ है। पूरा देश, केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें, पुलिस, डॉक्टर सब इस संकट के समय मे अपने तन मन धन के साथ देश की सेवा में लगे हुए है। यहां तक कि देश का आम आदमी भी अपनी हैसियत के हिसाब से देश की सेवा में लगा हुआ है।  ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि ये देश पर सकंट की घड़ी ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक परिवार पर संकट आता है सब एकजुट होकर उस संकट से उभारने की कोशिश करते है। ये संकट की घड़ी जल्द ही खत्म भी हो जायेगी।।

 

 

इस सारे घटनाक्रम में सरकारों को चलाने वाले व्यक्ति कहाँ है जो देश की किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आते है चुनाव के समय में। अगर आज चुनाव का मौसम देश मे होता तो कई प्रकार से लोग सत्ता हासिल करने के लिए देश की जनता से वादे करती नज़र आती, लेकिन क्या आज उनका फ़र्ज़ नही बनता कि जब देश को, देश की आम जनता को उनकी, उनकी सुविधाओं की जरूरत है तो आज कहाँ है वो सब लोग जो अपने आपको को हिन्दू की सरकार मुसलमान की सरकार ना जाने किस किस के हितैषी बन कर सामने आते है।

 

 

 

कहाँ है वो नेता जो चुनाव के समय मे जनता के घर घर जाकर उनके हाल पूछती है आज जब सबको उन नेताओ की सच मे जरूरत है उनके सुविधाओं की उनके पैसे की, तो वो गायब हो गए या उनको धरती निगल गयी या आसमान। सब जगह उन लोगो का नामो निशान नही न्यूज़ में देखो तो वो नही न्यूज़ पेपर में देखो तो वो गायब, कोई जनता से आज के समय के लिए वादा नही किसी तरह का प्रलोभन नही, क्या यही वो साथ था जिसके वादे वो जनता को चुनावी मौसम में करते थे

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी हैं।

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