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Piya Nahi Aaye

यायावर
यायावर
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घिरि-घिरि आई कारी बदरिया
पिया नाही आए साँझ भई
हूक उठाए काली कोयलिया
पिया नाही ………
सुबह से सूनी मोरी दुअरिया
पाथर हो गयी मोरी नजरिया
कैसे भरूँ मै नयन गगरिया
पिया नाही ………
मनवा बेकल तन दुपहरिया
पिया नाही ………
सुन री सखी ना सोहे नगरिया
पिया नाही ………
भेद मोरा सब ले गए साजन
उन बिन सूना मोरा आंगन
जिया नाही लागे बैठी अटरिया
पिया नाही ………
अंखियां सजल हैं मनवा विकल है
कसक जिया में अब हर पल है
कंटक लागे ठंडी बयरिया
पिया नाही आए सांझ भई!!

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