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मेरी तन्हाई

यायावर
यायावर
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एक लम्बा और उलझनों भरा सफ़र
तय करके जब पहुंचा मंजिल के करीब
तो देखा, मेरी अज़ीज़ दोस्त
वहां पहले से ही मौजूद थी
उसने गर्मजोशी से मेरा
इस्तकबाल किया, गले से लगाया
दरअसल, मेरी तन्हाई हमेशा मुझसे
कुछ कदम तेज चलती।

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