Menu
blogid : 13169 postid : 754124

बड़े से बड़ा सुख

यायावर
यायावर
  • 12 Posts
  • 13 Comments

बड़े से बड़ा सुख भी
एक छोटे से दुख को
बेदखल नहीं कर सकता 
दुख का वजूद 
कायम रहता है
सुख के समानांतर
एक दुख को
दूसरा दुख ही
बेदखल करता है
परत दर परत
दुख की सतह 
मोटी होती जाती है  हम प्रायः सबसे 
ऊपरी सतह से
जूझते रहते हैं 
सुख तो तात्कालिक और
अस्थाई होता है
अतिशीघ्र वाष्पित 
हो जाता है
जबकि दुख ठोस 
और स्थायी होता है
घनीभूत होकर 
जम जाता है
संवेदना की जमीन पर.

Read Comments

Post a comment