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ऑलमोस्ट एलेवेन मिनट्स

यायावर
यायावर
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ये सृष्टि कैसे उत्पन्न हुई?
ये स्वयंभू है या किसी ईश्वर
खुदा, या गॉड की कृति?
इस बहस में पड़ने की मेरी
न तो कोई रूचि है और न
काबिलियत
मगर ‘वो’ एहसास सृष्टि के
साथ ही पैदा हुआ प्रतीत
होता है
वही, जिसके वशीभूत होकर
‘श्रद्धा’ और ‘मनु’ आकर्षित हुए
या ‘आदम’ और ‘ईव’ पास आये
फिर क्या फर्क पड़ता है जो इन्हें
स्वर्ग से निष्काषित कर दिया गया
और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता
जिससे ये साबित हो कि ‘श्रद्धा-मनु’
‘आदम-ईव’ कभी अपने निर्णय पर
शर्मिंदा हुए थे
क्या इनका आकर्षण महज
जिस्मानी था?
नहीं…..ऐसा मुमकिन नहीं
इसमें संदेह नहीं कि जिस्म में
बेपनाह आकर्षण होता है;
मखमली केश-राशियाँ
धवल-ओजस्वी ललाट
करीनेदर, कमान सी भवें
नाजुक पलकों से रक्षित
मासूम निगाहें
नुकीली नासिका तथा
कलियों जैसे रस-सिक्त
अधरोष्ठ
धवल -श्वेत दंतावलियाँ
नटखट जिह्वा का अलौकिक
स्वाद
गुलाबी गाल, सलीकेदार ग्रीवा
और उससे अवरोही पृष्ठ-प्रदेश
अग्र भाग में एक मांसल नलिका
से पृथक दो गरिमामय
अर्धवृत्ताकार मांसल संरचनाएं
और इनपर सुर्ख वृत्ताकार वलयों
के मध्य घुंडीदार आकृतियाँ
इनसे अवरोहित उदर-मध्य
आदि-बिंदु
सघन-कुंचित रोम प्रदेश से
अवरोहित मांसल मुकुलित
कलियों का युग्म
आश्वस्ति प्रदान करती भुजाएं
कदली-स्तम्भ सी मांसल जांघें
जांघों के पृष्ठ में जिस्म को
संतुलन प्रदान करते दोनों
मांसल अर्धवृत्त
ये सब बेहद आकर्षित करते हैं
ये मदहोश, बल्कि बेहोश कर
सकते हैं
लेकिन ये खिंचाव यांत्रिक
नहीं हो सकता
शरीर की अपनी अलग ही
भाषा होती है
जिसे समझने और आत्मसात
करने के लिए
रूहानी नज़र और निरावृत्त
मस्तिष्क की अपेक्षा है
अन्यथा, जिस्मानी आकर्षण
महज क्षणिक और यांत्रिक
ही हो सकता है
हाँ मगर, इसके लिए असीम
धैर्य और आकर्षण को पवित्रता
प्रदान करने के लिए
प्रथम श्रेणी की सच्चरित्रता
अपेक्षित होती है
अन्यथा, दो जिस्मों को
संतुष्ट होने के लिए
ऑलमोस्ट एलेवेन मिनट्स*
ही तो चाहिए!!
*’एलेवेन मिनट्स’ विश्वप्रसिद्ध ब्राजीली लेखक पाउलो कोएल्हो की प्रख्यात कृति है!

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