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कोरोना में उत्सव, (बाल कविता)

उलझन ! मेरे दिल की ....

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आया दशहरा ,आयी दिवाली ,

पर इस बार विशेष है ,

क्रोना थोड़ा कम तो हुआ है , 

 

पर खतरा अभी भी शेष है !

दुनिया सारी है संकट में ,

क्रोना की इस महामारी में 

सब कुछ जैसे थम सा गया था 

 क्रोना की इस महामारी में 

क्रोना रूपी महामारी को 

स्वछता से मार भगाएंगे , 

मिलेंगे जुलेंगे दूरी रख कर हम  

चेहरे को मास्क से ढक  कर हम 

साबुन को हाथो में रखकर हम 

इस बीमारी को मार भगाएँगे  , 

क्रोना से जीत ही जायेंगे ,

कोरोना से जीत ही जायेंगे हम !!

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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