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राज-बेनाम कोहड़ा बाज़ारी

बेनाम कोहड़ाबाज़ारी उवाच

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ये क्या किया बेनाम, कि शख्सियत ही खुल गयी,
तेरी जुबाँ से बेहतर , तेरी ख़ामोशी थी।

बेनाम कोहड़ा बाज़ारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

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