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जहां नक्शा में मौजूद हैं चकमार्ग, धरातल पर नहीं

विजय कुमार

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नक्शा पर चकमार्ग बना कर भूल गया विभाग 
चकमार्गों को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु चल रहा विशेष अभियान 
गायब चकमार्गों में कैसे दिखेगा अतिक्रमण 

 

सवाल है, क्या ऐसे चकमार्ग जिन्हें किसानों की सुविधा हेतु वर्षों पहले ढेर सारा धन एवं श्रम खर्च करते हुए लम्बी माथापच्ची के बाद चकबन्दी विभाग ने नक्शे पर उकेरा, वह अतिक्रमण एवं विभागीय उदासीनता का शिकार होकर विवाद का विषय और खेतों का हिस्सा बने रहेंगे?


 

बलिया। ग्राम पंचायतों के चकमार्ग पर अतिक्रमण, खतौनी से संबंधित समस्याओं व वरासत के लंबित मामलों के एक साथ समाधान के लिए जिला प्रशासन द्वारा 21 सितंबर से 05 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

लेखपाल खतौनी एवं खेतों के नक्शा साथ लेकर क्षेत्र में दिखाई दे रहें हैं। ग्राम पंचायतों में चकमार्गों को अतिक्रमण मुक्त किया जाना है। ऐसे में वे चकमार्ग जो अभी तक महज नक्शे की शोभा बने हुए हैं, उनके अस्तित्व में आने की किसानों को उम्मीद नजर आने लगी है। ऐसा ही एक मामला नजर आया ‘खाप वेनीपाह’ मौजे में जहां के कई चकमार्ग महज नक्शे की शोभा बने हुए है। धरातल पर उनका कोई पता नहीं। बलिया जनपद के सदर तहसील अन्तर्गत आने वाले राजस्व क्षेत्र हल्दी का यह कृषि मौजा हल्दी-सहतवार मार्ग पर बिगहीं गांव के समीप स्थित है।

जिला प्रशासन के इस विशेष अभियान अभियान के तहत खाप वेनीपाह में सर्वे कर रहे लेखपाल देवेश पाण्डेय ने बताया कि खाप वेनीपाह में कोई अतिक्रमण नहीं दिखा। अलबत्ता, कई एक चकमार्ग भी नहीं दिखे। ऐसे में वे चकमार्ग जो केवल मानचित्र पर मौजूद हैं और धरातल पर उनका पता नहीं, वह महज खेतों का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे चकमार्गों का अतिक्रमण कैसे नजर आयेगा?

सवाल है, क्या ऐसे चकमार्ग जिन्हें किसानों की सुविधा हेतु वर्षों पहले ढेर सारा धन एवं श्रम खर्च करते हुए लम्बी माथापच्ची के बाद चकबन्दी विभाग ने नक्शे पर उकेरा, वह अतिक्रमण एवं विभागीय उदासीनता का शिकार होकर विवाद का विषय और खेतों का हिस्सा बने रहेंगे? संबंधित लेखपाल इसे व्यक्तिगत रुप से हल करने की बात कहते हैं।

राजस्व एवं शासकीय अभिलेखों से मिली जानकारी के अनुसार, खाप वेनीपाह मौजे में वर्ष 1997 में चकबन्दी की प्रक्रिया सम्पन्न हुई। बलिया के तत्कालीन जिलाधिकारी सह जिला चकबन्दी अधिकारी नरेश कुमार के माध्यम से 18 नवम्बर 1997 को चकबन्दी की धारा 52 के प्रकाशन की संस्तुति के बाद खाप वेनीपाह मौजे के खेतों का नया नक्शा जारी कर दिया गया। वहां के किसानों को खतौनी इत्यादि तहसील से मिलने लगी। बावजूद इसके, कब्जा परिवर्तन की महत्वपूर्ण कार्यवाही महज कागजी खानापूर्ति बन कर रह गयी।

इलाके के किसान दुःख व्यक्त करते हुए कहते हैं कि, विभागीय उदासीनता के बाद किसानों ने व्यक्तिगत रुप से खेतों को नये परिसीमन के अनुसार करने का प्रयास किया लेकिन, बात मारपीट में बदल गयी। जैसे-तैसे पुराने नक्शे के अनुसार ही खेती हो रही ह। ऐसे में यहां के चकमार्गों की बात बेमानी हो गयी है।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार खाप वेनीपाह के भू-मानचित्र पर खसरा संख्या 10, 12, 34, 53, 40 एवं 48 पर चकमार्ग एवं नालियां दिखाई गयी हैं। क्षेत्रफल के अनुसार यह 0.1740 हेक्टेयर की जमीन पर बने हुए हैं। धरातल पर इनके नहीं होने से एक ओर जहां किसान इनसे लाभान्वित नहीं हो पा रहें हैं, वहीं संबंधित ग्रामसभा द्वारा इन पर कोई विकास कार्य भी नहीं कराया जा सका है।

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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