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आईसीएमआर की हां का इंतजार

विजय कुमार

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बीएचयू के माइक्रोबायॉलजी विभाग में जापानी इंसेफलाटिस, डेंगू व चिकन गुनिया जैसी बीमारियों के वायरसों की काट खोजने पर भी काम चल रहा है। विभाग में स्थापित वायरस रिसर्च ऐंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) में वैज्ञानिक उन मच्छरों के जहर को खत्म करने वाली वैक्सीन इजाद करने में जुटे हैं, जिनके काटने से गंभीर बीमारियां फैलती हैं।

माइक्रोबायॉलजी विभाग के प्रफेसर गोपालनाथ ने बताया कि बैक्टीरियोफॉज से गंभीर रोगों के इलाज के अब तक के प्रयोग सफल रहे हैं। इसका इंजेक्शन व स्प्रे तैयार करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के पास विचाराधीन है।

बैक्टीरियोफॉज के इंजेक्शन या फिर स्प्रे से खासकर सेप्टीसीमिया, गैंगरीन, फेफड़े की टीबी जैसी बीमारियों का कारगर इलाज संभव है। इतना ही नहीं मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट के चलते मायकोबैक्टीरियम प्रजातियों के संक्रमण से होने वाले रोग भी बैक्टीरियोफॉज से ठीक हो सकेंगे। कॉलरा, टायफाइड, डायरिया आदि के बैक्टीरिया को खत्म करने वाला बैक्टीरियोफॉज भी खोज लिया गया हैं।

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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