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khwab

zindggi

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तुम कहते हो ना
कांच टूट कर भी
कांच ही रह जाता है
मगर ख्वाब कभी नहीं….

तुम ही आके समझाओ
इसको,
मेरी आँखों की बाहों में
तोडा है
दम जिसने ..
यह दिल अब भी
उसे ख्वाब कह
रहा है…..

—-आंच—-

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