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Transaction Of Business Rules,1993 का नियम 55(1) दो कारण से असंवैधानिक

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दिल्ली जनलोकपाल विधेयक को विधानसभा में पास कराने के लिए केन्द्र सरकार (गृह मंत्रालय) की मंजूरी लेना अनिवार्य बताने वाली Transaction Of Business Rules,1993 का नियम 55(1) दो कारण से असंवैधानिक है।

1.अनुच्छेद 255 के तहत किसी विधेयक को महज इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि विधानसभा में इसे पास कराने के लिए राष्ट्रपति का मंजूरी की जरुरत थी लेकिन मंजूरी नहीं ली गई ,बशर्तेँ कि राष्ट्रपति विधानसभा में पास हो जाने के बाद उसे मंजूरी दे दे।National Capital Territory Act,1991 की धारा 26 के तहत भी किसी विधेयक को महज इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि दिल्ली विधानसभा में इसे पास कराने के लिए मंजूरी की जरुरत थी लेकिन मंजूरी नहीं ली गई,बशर्तेँ कि राष्ट्रपति विधानसभा में पास हो जाने के बाद उसे मंजूरी दे दे।गौर करने वाली बात ये है कि NCT ACT,1991 का धारा 26 में ये नहीं लिखा है कि आखिर किससे पूर्व की मंजूरी लेने की जरुरत थी-राष्ट्रपति या केन्द्र सरकार।मतलब संविधान और NCT ACT,1991 (जिस कानून के तहत दिल्ली सरकार का कार्यप्रणाली तय किया गया है) मेँ कहीँ पर भी केन्द्र सरकार से मंजूरी लेने का प्रावधान नहीं किया गया है।फिर Transaction of Business Rules,1993 का नियम 55(1) विधेयक पास कराने से पहले केन्द्र सरकार का मंजूरी लेने का बात किस आधार पर कहता है क्योँकि केन्द्र सरकार से मंजूरी लेने का कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है।

2.TRANSACTION OF BUSINESS RULES,1993 को National Capital Territory Act,1991 की धारा 44 के अंतर्गँत राष्ट्रपति को प्रदत शक्तियों के तहत बनाया गया है।National Capital Territory Act,1991 की धारा 44 के तहत जो शक्तियाँ राष्ट्रपति को दी गई है,उसमें मंत्रीपरिषद के कार्यप्रणाली पर नियम बनाना,उप-राज्यपाल और मंत्रीपरिषद के बीच राय में भिन्नता की स्थिति मेँ नियम बनाना,मंत्रीपरिषद के द्वारा की गई कार्य को उप-राज्यपाल के नाम से की गई कार्य बताने के लिए नियम बनाना आदि शामिल है।National Capital Territory Act,1991 की धारा 44 के तहत ऐसी कोई भी शक्ति राष्ट्रपति को नहीं दी गई है जिस आधार पर दिल्ली विधान सभा में पास की जाने वाली विधेयक को लेकर नियम बनाया जाए।इसलिए Transaction Of Business Rules,1993 का नियम 55(1) असंवैधानिक है क्योंकि इस नियम को बनाने का अधिकार National Capital Territory Act,1991 की धारा 44 के अंतर्गंत राष्ट्रपति को प्रदत शक्तियों के तहत राष्ट्रपति के पास नहीं था।

संविधान का अनुच्छेद 239 AA (3)(C) के तहत दिल्ली विधानसभा के लिए विशेष प्रावधान है।इस अनुच्छेद के तहत अन्य राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश के विधानसभा द्वारा बनाया गया ऐसा सारा कानून असंवैधानिक होगा जिसका प्रावधान संसद के द्वारा बनाया गया कानून के साथ conflict करता हो लेकिन दिल्ली विधानसभा द्वारा बनाया गया ऐसा कानून असंवैधानिक नहीं होगा,बशर्तेँ कि राष्ट्रपति ऐसे कानून का मंजूरी दे दे।

इन सारे कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर दिल्ली लोकपाल विधेयक को विधानसभा में पास कराकर राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है और विधेयक पास कराने के लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी नहीं लेने या दिल्ली लोकपाल बिल ,2014 का केन्द्र सरकार के द्वारा पारित कराए गए लोकपाल और लोकायुक्त कानून,2013 के प्रावधानों के खिलाफ होने के कारण इस बिल को असंवैधानिक करार नहीं दिया जा सकता।

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