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राजनीतिक पदों पर महिला प्रतिनिधित्व में भारत की स्थिति

Ankit Tomar Khera Gadai

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राजनीति में उच्च पदों पर महिला प्रतिनिधित्व में भारत की हालत बहुत ज्यादा खराब है| फिर भी हम बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारे देश में तो तीसरे नंबर पर ही महिला प्रधानमंत्री बन गयी थी| एक महिला देश कि राष्ट्रपति भी रह चुकी हैं| देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में तो 1962 मे महिला मुख्यमंत्री बन गयी थीं| इसके अतिरिक्त एक दलित महिला भी 4 बार मुख्यमंत्री रहीं| पर क्या इतना पर्याप्त है|

हमारे देश में अब तक 11 व्यक्ति 16 बार प्रधानमंत्री बने हैं| उनमें से केवल एक महिला 2 बार पीएम बनीं| 16 लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं उनमे भी केवल 1 ही महिला हैं| उत्तर प्रदेश मे 21 व्यक्ति 32 बार मुख्यमंत्री बने हैं उनमें केवल 2 महिलाएं 5 बार सीएम बनी हैं| आज तक एक भी महिला उपराष्ट्रपति नहीं बन सकी है| नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश ,मणिपुर ,त्रिपुरा ,सिक्किम ,महाराष्ट्र ,आंध्र प्रदेश ,तेलंगाना ,केरल ,कर्नाटक ,हिमाचल प्रदेश ,उत्तराखंड ,हरियाणा, झारखण्ड ,छत्तीसगढ़ इन 17 राज्यों में कभी कोई महिला सीएम नहीं बन सकी है| शेष बचे 9 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पंजाब ,राजस्थान ,मध्य प्रदेश ,गुजरात ,बिहार ,गोवा ,उड़ीसा में केवल एक ही महिला को सीएम बनने मौका मिला| सिर्फ उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में ही दो–दो महिलाए सीएम बनीं हैं|

बिहार मे चुनाव में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 243 है और वहां आजादी से लेकर आज तक हुए चुनावों में कुल 232 महिलाएं ही जीतकर विधानसभा पहुचीं| सन 1969 के विधानसभा चुनाव में तो 3 महिलाएं ही विधायक बन सकीं, 2005 के चुनाव में भी चार को ही जीत नसीब हुई| 2010 के चुनाव में सबसे ज्यादा 34 महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुँचीं| 2015 के पिछले चुनाव में पुरुषों का मतदान प्रतिशत 54% और महिलाओं का 59% था| मतलब वोट करने मे महिलाओं का उत्साह पुरुषों से ज्यादा था| परन्तु 28 महिला ही विधायक बन सकीं| इस चुनाव में आरजेडी,बीजेपी ,जेडीयू और कॉंग्रेस ने कुल मिलाकर 39 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया, जिनमें से 28 की जीत हुई|

महिला विधायकों की कम संख्या का मुख्य कारण पार्टियों द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिया जाना है| सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता अपनी पार्टी और अपने आप को महिला हितैषी बताने का दावा करते नहीं थकते| परंतु इन्हीं पार्टियों और इन नेताओं के द्वारा महिलाओं की टिकट नहीं दिये जाते| यदि महिलाओं को अधिक टिकट दिए जाए तो निश्चित रूप से सदनों में महिलाओ की संख्या बढ़ेगी|

 

डिस्कलेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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