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रामविलास पासवान के जाने के बाद क्या चिराग पासवान को नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल मे जगह देंगे

Ankit Tomar Khera Gadai

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राजनीति के मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान नहीं रहे| जेपी आंदोलन से राजनीति का ककहरा सीखकर सोशलिस्ट पार्टी से राजनीति की शुरुआत की| उन्हे मौसम वैज्ञानिक इस कारण कहा जाता है क्योकि वे सत्ताधारी गठबंधन मे रहे जबकि वे गठबंधन हमेशा चुनाव से पहले करते थे|राजनीति मे पहला बड़ा पद 1969 मे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से विधायक बनकर मिला|1974 मे वे लोकदल की स्थापना के इसमे शामिल हो गए और महासचिव बने| आपातकाल के बाद हुए 1977 के चुनाव मे वे हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से संसद चुने गए| उसके बाद 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004, 2014 मे जीतकर लोकसभा पहुंचे| वर्तमान मे वे राज्यसभा सांसद और मोदी कैबिनेट मे उपभोक्ता , खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे|

2000 मे लोक जनशक्ति पार्टी का गठन कर वे इसके संस्थापक अध्यक्ष बने| 2005 के विधानसभा चुनाव मे रामविलास पासवान मे यूपीए मे रहते हुए लालू यादव की पार्टी आरजेडी के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार दिये थे और कॉंग्रेस से दोस्ती निभाई थी| इस कारण लालू यादव की हार हुई तथा किसी को भी बहुमत नही मिला था तथा कोई गठबंधन भी नहीं बन पाया| जिस कारण 2005 मे ही बिहार मे दोबारा चुनाव हुए और नीतीश कुमार की जीत हुई | तब से बिहार मे नितीश ही सत्ता मे है |अब लोजपा की कमान उनके बेटे चिराग के हाथ मे है| वो भी इसी फार्मूले को नितीश कुमार के खिलाफ आजमाएगे| चिराग के साथ पिता के जाने गम के साथ लोगो की साहनुभूति भी रहेगी|

दूसरा सवाल है -क्या  मोदी कैबिनेट मे रामविलास पासवान के जाने से खाली हुए मंत्री पद को दोबारा लोजपा कोटे के लिए रखा जाएगा या फिर लोजपा को कोई मंत्री पद नही मिलेगा| जिस तरह से बीजेपी नेता कह रहे है की एनडीए के किसी भी दल का विरोधी बीजेपी का विरोधी है| उससे तो मंत्री पद मिलने के आसार कम ही लगते है| अगर बिहार चुनाव मे नीतीश कुमार ज्यादा नुकसान हुआ और एनडीए की हार हो गयी तो चिराग पासवान की लोजपा का एनडीए से बाहर निकालना तय है| ऐसी स्थिति मे अगर रामविलास पासवान रहते तो उन्हे मंत्री पद से हटाना मुश्किल होता और अपने संबंधो व ऊंचे कद से स्थिति को संभाल सकते थे|

लोजपा को 2014 मे यूपीए से एनडीए मे लाने का काम चिराग पासवान ने ही किया था| वो केवल रामविलास पासवान के बेटे के तौर ही नहीं पहचाने जाते| उनकी गिनती प्रभावशाली नेताओ मे होती है| युवा बिहारी कार्यक्रम से वो युवाओ के बीच खूब लोकप्रिय है| इस कारण बिहार चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी चिराग पासवान को अपनी कैबिनेट मे मंत्री पद दे सकते है| परंतु उन्हे अपने पिता की तरह कैबिनेट मंत्री का पद और मजबूत विभाग नही मिलेगा| उन्हे किसी बड़े विभाग के राज्यमंत्री के तौर पर मंत्रिमंडल मे शामिल किया जा सकता है|

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