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West Champaran : आग में जली रीना, नौ साल बाद अदालत ने पति-सास-ससुर को ठहराया दोषी

Published: Tue, 06 Oct 2026 04:56 PM (IST)

पश्चिम चंपारण के रामनगर में नौ साल पहले रीना देवी की मौत के मामले में अदालत ने पति, सास और ...और पढ़ें

कोर्ट से बाहर निकलते अभियुक्त। जागरण

कोर्ट से बाहर निकलते अभियुक्त। जागरण 

HighLights

  1. रीना देवी की मौत मामले में पति, सास, ससुर दोषी करार।

  2. दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप सिद्ध।

  3. अदालत ने नौ साल बाद सुनाया फैसला, सजा 14 अक्टूबर को।

संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। रामनगर थाना क्षेत्र के दुर्गानगर में नौ साल पहले रीना देवी की मौत के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को पति रंजीत चौधरी, सास दयामंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद को आइपीसी की धारा 498ए और 306 के तहत दोषी करार दिया।

अभियोजन की ओर से धारा 498 ए एवं 302/34 के अंतर्गत आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सजा के बिंदु पर 14 अक्टूबर को सुनवाई होगी। दोषी करार दिए गए मथुरा प्रसाद बगहा एसडीएम कार्यालय में बाबू रह चुके हैं, जबकि दयामंती देवी स्वास्थ्य विभाग में नर्स रह चुकी हैं।

मामले में शेखपुरा जिले के शेखोपुर सराय थाना क्षेत्र के पांची निवासी उपेंद्र प्रसाद ने 19 जनवरी 2017 को रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार उनकी पुत्री रीना देवी की शादी वर्ष 2002 में रंजीत चौधरी के साथ हुई थी।

शादी के कुछ वर्षों बाद से ही ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा रीना के साथ मारपीट और प्रताड़ना किए जाने की शिकायत मायके वालों को मिलती रहती थी। आरोप था कि दहेज को लेकर उसे परेशान किया जाता था।

घटना के दिन मथुरा प्रसाद ने फोन कर रीना के आग में जलकर मरने की सूचना दी थी। इसके बाद मृतका के पिता उपेंद्र प्रसाद ने पति रंजीत चौधरी, सास दयामंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद पर उनकी पुत्री को जलाकर मारने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले में रामनगर थाना कांड संख्या 28/2017 दर्ज की गई।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इनमें सूचक उपेंद्र प्रसाद, चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार तिवारी और अनुसंधानकर्ता मनोरंजन कुमार चौधरी समेत अन्य गवाह शामिल थे।

रीना ने सीजेएम कोर्ट शेखपुरा में भी दिया था आवेदन

अभियोजन ने मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी, आरोपपत्र, पंचनामा और मृतका की ओर से सीजेएम कोर्ट, शेखपुरा में दिए गए आवेदन को भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। मृतका के आवेदन में पति, सास-ससुर और देवर पर मारपीट व प्रताड़ना का आरोप लगाया गया था।

अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों की गवाही और साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। मामले में पति, सास और ससुर पर विवाहिता को प्रताड़ित करने तथा आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।

न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीनों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने 26 अप्रैल 2017 को आरोपितों के विरुद्ध आरोप गठित किया था। इसके बाद मामले में गवाही और साक्ष्य की प्रक्रिया चली। 24 फरवरी 2026 को आरोपितों का बयान भी दर्ज किया गया।