पश्चिम चंपारण के किसानों को करनाल से मिलेगा गन्ने की खेती का नया गुर, कम लागत में बढ़ेगी उपज
मझौलिया के किसान गन्ने की खेती में बढ़ती लागत और कम उत्पादन की चुनौतियों से निपटने के लिए हरियाणा के ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण के किसान ले रहे प्रशिक्षण।
मोहम्मद मुस्लिम, मझौलिया (पश्चिम चंपारण)। गन्ने की खेती में बढ़ती लागत और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के बीच मझौलिया के किसान अब हरियाणा के करनाल की उन्नत तकनीक को अपने खेतों में आजमाएंगे।
मझौलिया शुगर इंडस्ट्रीज के 20 किसानों का दल करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान में प्रशिक्षण ले रहा है। बिहार सरकार की ओर से संचालित गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम के तहत किसानों को करनाल भेजा गया है।
दल का नेतृत्व चीनी मिल के डिप्टी कैन मैनेजर शिवेंद्र पांडेय कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गन्ने के उन्नत प्रभेदों के साथ वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जाएगी।
फसल की तैयारी से लेकर बेहतर बढ़वार तक की पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी। किसान उचित दूरी पर रोपण, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक के इस्तेमाल और खेत प्रबंधन के तरीके सीखेंगे। इसके अलावा सिंचाई की बेहतर व्यवस्था, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने के उपायों का भी प्रशिक्षण मिलेगा।
डीजल, खाद और मजदूरी का खर्च घटाने पर जोर
मझौलिया क्षेत्र में गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। हालांकि डीजल, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई और खेत की तैयारी पर बढ़ता खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। समय पर सिंचाई नहीं मिलने से गन्ने की बढ़वार और वजन प्रभावित होता है।
वहीं गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता तथा लाल सड़न और तना छेदक जैसे रोग-कीट भी उत्पादन को प्रभावित करते हैं। क्षेत्र में गन्ने की औसत उपज करीब 20 से 35 टन प्रति एकड़ बताई जाती है।
किसानों का कहना है कि वैज्ञानिक विधि अपनाकर उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है। किसानों के अनुसार खेत से गन्ना तैयार कर मिल गेट तक पहुंचाने में प्रति क्विंटल करीब 190 से 220 रुपये तक खर्च आता है। हालांकि वास्तविक लागत खेत, मजदूरी, सिंचाई और अन्य खर्च के अनुसार अलग-अलग होती है।
सीखकर लौटेंगे तो दूसरे किसानों तक पहुंचेगी तकनीक
मझौलिया शुगर इंडस्ट्रीज के महाप्रबंधक (गन्ना) अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण देने का उद्देश्य उन्हें गन्ने की वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों से जोड़ना है।
करनाल से मिली जानकारी को किसान अपने खेतों में प्रयोग करेंगे। इससे उत्पादन लागत कम करने और प्रति एकड़ उपज बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण से लौटने वाले किसानों के अनुभवों और खेतों में किए गए प्रयोगों को अन्य किसानों तक भी पहुंचाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान नई तकनीक अपनाकर गन्ने की खेती को लाभकारी बना सकें।
मिल की ओर से किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने के लिए जयश्री किसान परिवार एप शुरू किया गया है। करनाल प्रशिक्षण और मोबाइल आधारित तकनीकी जानकारी को साथ जोड़कर किसानों को खेती की आधुनिक विधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है।
--अखिलेश कुमार सिंह, गन्ना महाप्रबंधक , मझौलिया चीनी मिल
