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पश्चिम बंगाल में पिंजरा खुला तो नए जंगल को निहारने लगी बिहार के वीटीआर की राजकुमारी

By Vivek KumarEdited By: Dharmendra Singh
Published: Fri, 02 Oct 2026 07:17 PM (IST)

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू की गई बाघिन टी-138 को गांधी जयंती पर पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में ...और पढ़ें

भूपेंद्र यादव ने हरी झंडी दिखाकर एनक्लोजर का द्वार खुलवाया।

भूपेंद्र यादव ने हरी झंडी दिखाकर एनक्लोजर का द्वार खुलवाया।

HighLights

  1. बाघिन टी-138 को वीटीआर से बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया।

  2. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण पहल का उद्घाटन किया।

  3. 14 दिन के रेस्क्यू के बाद 72 घंटे निगरानी में रखी गई।

विवेक कुमार, गौनाहा(पश्चिम चंपारण)। गांधी जयंती पर शुक्रवार को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से रेस्क्यू की गई बाघिन टी-138 को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व के जंगल में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया।

एनक्लोजर का पिंजरा खुला तो वीटीआर की यह राजकुमारी कुछ पल ठहरी और फिर बक्सा के जंगल को निहारते हुए अपने नए प्राकृतिक घर की ओर बढ़ गई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरी झंडी दिखाकर एनक्लोजर का द्वार खुलवाया।

बाघिन को वीटीआर से सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए करीब 14 दिनों तक अभियान चला था। रेस्क्यू के बाद विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे हवाई मार्ग से बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया था।

वहां करीब 72 घंटे तक एनक्लोजर में रखकर उसकी सेहत, व्यवहार और नए वातावरण में अनुकूलन की निगरानी की गई। सामान्य स्थिति मिलने के बाद उसे खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक संरक्षण और प्रजाति संरक्षण के विजन से प्रेरित होकर बक्सा में बाघों के पुनर्स्थापन का महत्वपूर्ण कार्य पूरा हुआ है।

उन्होंने बताया है कि बाघिन टी-138 को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाया गया है। उन्होंने इस सफल पुनर्स्थापना में सहयोग के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रति आभार जताया है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर पश्चिम बंगाल वन विभाग के अधिकारी व कर्मियों के साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक गौरव ओझा भी मौजूद रहे। अब वन विभाग की टीम बाघिन की गतिविधियों और उसके विचरण पर लगातार नजर रखेगी।