रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में फैसला, सगी बहन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद; 1-1 लाख रुपये का जुर्माना
रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसमें मृतक की सगी बहन गीता देवी भी शामिल है।

चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में फैसला
HighLights
विजय सहनी हत्याकांड में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा।
मृतक की सगी बहन गीता देवी भी साजिश में शामिल।
एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
जागरण संवाददाता, बगहा। रामनगर के विजय सहनी हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने शनिवार को पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने महफूज अंसारी, उम्र 42 वर्ष, पिता रहीम अंसारी, निवासी सोनखर, थाना रामनगर, राजकिशोर महतो, पिता स्व. दुर्योधन महतो, निवासी सोनखर, थाना रामनगर, तेतर राम उर्फ साधु, उम्र 59 वर्ष, पिता स्व. मंगनी राम, निवासी गोवर्धना, थाना गोवर्धना, श्री मुशहर, उम्र 44 वर्ष, पिता स्व. मुनरिका मुशहर, निवासी छंगुराही बंजरिया, थाना रामनगर और गीता देवी, उम्र 61 वर्ष, पति राजनारायण चौधरी, निवासी नेपाली टोला, थाना रामनगर, जिला पश्चिम चंपारण को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 व धारा 120(बी) के तहत दोषी करार दिया।
भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास
अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद के साथ प्रत्येक पर एक लाख रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं, साक्ष्य छिपाने के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इस तरह प्रत्येक दोषी को कुल 1.25 लाख रुपये अर्थदंड देना होगा। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मुख्य आरोपित अशोक यादव को भी अदालत 31 अगस्त को दोषी करार दे चुकी है। उसके विरुद्ध सजा के बिंदु पर 11 सितंबर को फैसला सुनाया जाएगा।
2022 में हुई थी हत्या
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि मृतक विजय सहनी और गीता देवी तथा अशोक यादव के बीच पहले से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। विजय सहनी,गीता देवी का भाई था। अभियोजन के अनुसार, एक मई 2022 की शाम अशोक यादव ने विजय सहनी को फोन कर विवाद सुलझाने के लिए बुलाया था। विजय अपनी पत्नी को पूरी बात बताकर मोटरसाइकिल से घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में घटना के दिन विजय साहनी और तेतर राम के बीच लगातार मोबाइल पर बातचीत का भी उल्लेख किया गया। आरोपितों के मोबाइल फोन की टावर लोकेशन घटना के समय के आसपास गोवर्धना क्षेत्र में मिली थी।
घटना के दिन आरोपितों के बीच 21, 16, सात, सात, पांच और तीन बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। अदालत के समक्ष आरोपित इस असामान्य संपर्क का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
गड्ढा खोदकर मिट्टी में दफन किया
विजय सा्रहनी का अंतिम टावर लोकेशन गोवर्धना क्षेत्र में मिला था। इसी क्षेत्र में तेतर राम का घर और गोठा भी था। आरोपितों की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में नदी किनारे गड्ढा खोदकर मिट्टी में दफन किया गया विजय सहनी का शव बरामद किया गया था। उसकी मोटरसाइकिल भी आरोपितों की निशानदेही पर बरामद हुई थी।
गला दबाने से हुई थी मौत
अदालत के निर्णय के अनुसार, पोस्टमार्टम में विजय सहनी की मौत का कारण गला दबाने से दम घुटना पाया गया था। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जंगल में नदी किनारे गड्ढा खोदकर दफन किया गया। मोटरसाइकिल को भी घास-फूस से ढककर छिपाया गया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह, कुंदन सिंह और मिथिला शरण सिंह ने आरोपितों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने और परिवार के भरण-पोषण में उनकी भूमिका का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की थी।
