बगहा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरनाटांड़ में गर्भवतियों के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित शिविर में घोर लापरवाही सामने आई।यहां सैकड़ों की संख्या में पहुंची गर्भवतियों को न फल मिला और न ही दवा। जिसको लेकर उनमें आक्रोश दिखा।

पीएचसी के चिकित्सक डॉ. राजेन्द्र काजी के नेतृत्व में चिकित्सक डॉ. संदीप कुमार राय व डॉ. राजेश अवस्थी ने गर्भवतियों की जांच की। इस अभियान के तहत चिकित्सकों द्वारा गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच की गई। साथ ही उच्च जोखिम गर्भधारण महिलाओं की पहचान कर उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। मौके पर गर्भवतियों का खून, बीपी, शूगर, हिमोग्लोबिन, एचआइवी एवं कोविड सहित कई जांच की गई। चिकित्सक डॉ. काजी ने गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को संतुलित आहार, हरी सब्जी, दूध व फल आदि का सेवन करने के साथ आराम करने की सलाह दी । उन्होंने महिलाओं को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी। शरीर में खून की कमी को देखते हुए उस तरह की महिलाओं को नियमित रूप से आयरन की गोली खाने तथा एनीमिया से बचाव के लिए भोजन में कम नमक खाने को कहा गया। ताकि बीपी सामान्य में रहे। शिविर में 163 गर्भवती की जांच की गई।

पीएचसी में उपलब्ध नहीं आयरन व कैल्शियम की दवा : पीएचसी में मातृत्व शिविर के दौरान सबसे बड़ी परेशानी इन गर्भवतियों को दवा को लेकर देखी गई। चिकित्सकों ने गर्भवतियों की जांच दवा लिखी तो ये दवाएं अस्पताल से नदारद रहीं। ऐसे में महिलाओं को बाहर से निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ी। गर्भवती को चिकित्सक आयरन और कैल्शियम की दवा लेने की सलाह देते हैं। लेकिन ये दोनों दवाएं पीएचसी में उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं यहां न तो गर्भवती के बीच पौष्टिक आहार के रूप में दी जाने वाले न फल का वितरण किया गया और न ही शुद्ध पेयजल की ही व्यवस्था की गई थी। व्यवस्था के नाम पर शिविर में सिर्फ चार गुब्बारे ही नजर आए। इधर दवा न होने की वजह से शिविर में शामिल चिकित्सक भी काफी असहज नजर दिखे। मौके पर एएनएम अंजू डेविड, निर्मला कुमारी, आकांक्षा कुमारी, केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर संजय द्विवेदी, स्वास्थ्यकर्मी राकेश जायसवाल व धर्मेंद्र मांझी के साथ कई अन्य शामिल रहे।

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