हरनाटाड़, जेएनएन। हरनाटाड़ वनांचल से निकला नरभक्षी बाघ इंसानों से भी ज्यादा चतुर है। बैरिया कला गांव के सरेह में बार-बार नजर आ रहा है, लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा। उसे पकड़ने के लिए प्रशासन ने दो दिन से पूरी ताकत झोंक दी है। ड्रोन कैमरा, पिंजरा, ट्रेंकुलाइजर गन, महाजाल, रेस्क्यू वैन सहित तमाम संसाधन शातिर बाघ के आगे फेल साबित हो रहे हैं। वन कर्मियों ने बकरी बांधी ताकि बाघ उसका शिकार करने आ जाए।

वह हर चाल को समझते हुए समय-समय पर अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा रहा है। गुरुवार की सुबह करीब 5.30 बजे वह फिर उसी जगह नजर आया, जहां किसान को मौत के घाट उतारा था। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। नरभक्षी बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पूरी फौज मैदान में उतार दी है।

40 मिनट तक ढूंढती रही टीम

60 फॉरेस्ट गार्ड, पांच वैन, चार बड़े जाल, दो ट्रेंकुलाइज गन, दो ट्रैक्टर, 40 सीसीटीवी और एक ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। बुधवार की शाम वन विभाग की टीम बाघ के करीब पहुंच गई थी। फॉरेस्ट गार्ड ने उसे ट्रेंकुलाइज गन से शूट कर दिया था, लेकिन वो वहां से भाग निकला। टीम भी उसका पीछा करने लगी, ताकि जैसे ही बेहोश हो उसको पकड़ा जा सके। टीम जंगल में बाघ को 40 मिनट तक ढूंढती रही, लेकिन वो नहीं मिला।

लगातार घटना से सहमे ग्रामीण

हरनाटाड़ इलाके में बाघों की चहलकदमी और हिंसक व्यवहार से ग्रामीण सहमे हैं। 12 सितंबर को हरनाटाड़ के बैरियाकलां के सरेह में घास काट रही प्रेमा कुमारी को बाघ ने मार डाला था। 15 जुलाई को बैरियाकलां के ही धर्मराज काजी के शव का अवशेष हरनाटाड़ वन क्षेत्र में मिला था। जांच में बाघ के मारने की पुष्टि हुई थी। 14 मई को चिउटाहां वन क्षेत्र के जिमरी नौतनवा निवासी राजकुमार बैठा व 20 मई को बगहा-दो प्रखंड की पुरानी कटहां निवासी पार्वती को बाघ ने मार डाला था।

Edited By: Umesh Kumar