बेतिया। वाल्मीकि नगर विधान सभा का 40 हजार आबादी वाला ठकराहा प्रखंड आज भी अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है। सात पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस प्रखंड की तीन पंचायत के लोगों को प्रखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालय आने जाने का रास्ता नदी है और साधन के नाम पर नाव है। आजादी के 70 साल बाद भी ठकराहा प्रखंड जिला मुख्यालय से नहीं जुड़ सका। बेहतर इलाज,हाट बाजार के लिए यूपी जाने की मजबूरी है।

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बरसात में चार महीनों में घरों में लटका रहता है ताला

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नदी के दो धाराओं के बीच बसा प्रखंड का सबसे बड़ी पंचायत्त श्रीनगर यदि विकास से अछूता है तो वजह है कि उक्त पंचायत्त के लोगों को पंचायत्त से प्रखंड कार्यालय पहुंचने या जिला मुख्यालय दोनों ही ओर जान की बाजी लगाए बगैर आना-जाना संभव नहीं। यही कारण है कि पंचायत के अधिकांश घरों में बरसात के चार माह के लिए घरों में ताला लटका जाता है। लोग बैरिया , नौतन सहित अन्य प्रखंडों में शरणार्थी बन दिन गुजारने को मजबूर रहते। अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो खाट से ही ले जाया जाता है। गंभीर मरीज हो तो रास्ते में ही दम तोड़ देता है।

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नदी पर पक्का पुल होता तो सिमट जाती जिला मुख्यालय की दूरियां,

ठकराहा प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय की दूरी महज 24 किमी होने के बाद भी गंडक नदी पर पुल नहीं होने से लोगों को 150 किमी से अधिक दूरी तय कर आना जाना होता है। गंडक नदी पर पक्का पुल की मांग वर्षों से चली आ रही है। संसदीय चुनाव हो या विधान सभा का हर बार ठकराहा के जगिराहा घाट से पूजहा पटजिरवा को मिलाने के लिए गंडक नदी पर पक्का पुल का मुद्दा प्रमुख रहा है।

-------------------- कहते हैं लोग --------------------------------------

विजय चौधरी,राकेश कुमार, हरिलाल यादव,जंगबहादुर कुशवाहा, निजामुद्दीन अंसारी , मनोज साह , सुनीता देवी , चंदन गोंड, हरिलाल गोंड, शंकर बैठा, भरोस निषाद,भीम चौहान,बिदा देवी, सुमन देवी,राधिका देवी, सुशील तिवारी , अधिवक्ता उमाकांत तिवारी, राहुल तिवारी , मनीष तिवारी ने बताया कि वे प्रखंड में वर्तमान समय में सभी पंचायतों में हाई स्कूल की सौगात मिली पर पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं । यहां तक की जीएमयू 2विद्यालय में भी हाई स्कूल के एक भी शिक्षक नहीं है। नतीजा प्रखण्ड क्षेत्र के बच्चे प्राइमरी शिक्षा ग्रहण करने के बाद ही मजबूरन यूपी की ओर रुख कर लेते है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बन गया पर चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो सकी । महिला चिकित्सक की मांग वर्षो से उठती रही पर अबतक पूर्ण नहीं हो सका।

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जमींदार बांध का मुद्दा भी गरमाया

बिहार यूपी सीमा पर बहने वाली बासी नदी के उफान से प्रत्येक वर्ष प्रखंड के हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। इस वर्ष तो प्रखण्ड क्षेत्र के किसानों के लिए बासी नदी बर्बादी की गाथा लिख दी है। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। खरीफ फसल कौन कहे रबी की फसल की बुआई होगी की नहीं इसमें भी संशय है।

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