बेतिया। दीपावली महज पांच दिन शेष रह गए हैं। दीये तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। अधिकांश कुम्हार अपने दुकानों को सजा लिये है। लोगों ने खरीदारी भी शुरू कर दी हैं। फिलवक्त छोटे दीये साठ रुपये सैकड़ा बेचा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि दीये का रेट स्टॉक और डिमांड पर निर्भर करेगा। शुक्रवार से स्टाक और डिमांड का असर दिखने लगेगा। दुकान चला रही शांति देवी ने बतायी कि बाजार में आ गए कलात्मक चाइनीज दीये उनके धंधे को नुकसान पहुंचा रहे है। बावजूद वे लोग मुस्तैदी से कारोबार के लिए बाजार में डटे हुए हैं। वही कारोबारी हरिहर ने बताया कि मिट्टी की कीमत बढ़ी है। यही कारण है कि दीये बनाने के लागत में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पेट के लिए कारोबार करने की मजबूरी है। खानदानी परंपरागत पेशा है। छोड़ भी नहीं सकते है। उन्होंने दीये के दाम में इजाफा होने की उम्मीद जताई है।

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शुभकारी हैं मिट्टी का दीया जलाना

दीपावली में मिट्टी के दीये जलाना शुभ होता है। इसके कई कारण है। आचार्य सुजीत द्विवेदी के अनुसार मिट्टी को मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है। मंगल साहस, पराक्रम में वृद्धि करता है और तेल को शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि को भाग्य का देवता कहा जाता है। मिट्टी के दीये में दीपक जलाने से मंगल व शनि की कृपा मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस पांच तत्व से मानव शरीर का निर्माण होता है। उन्हीं पांच तत्वों से ही मिट्टी के दीये का निर्माण कुम्हार के हाथों होता है। पानी, आग, मिट्टी, हवा तथा आकाश तत्व मिट्टी के दीये में मौजूद होते है। वास्तुशास्त्र में भी इसका महत्व है। घर में अखंड दीप की व्यवस्था की जाए तो वास्तु दोष समाप्त हो जाएगी।

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चाइनीज दीप, मोमबत्ती भी लोगों की बनी पसंद

दीपावली में अपने घर और छत को जगमग करने के लिए कई परिवार कलात्मक, खूबसूरत चाइनीज दीप, मोमबत्ती, बिजली के झालर की खरीदारी को तरजीह दे रहे हैं। नगर का लालबाजार, मीना बाजार इनसे भरा हुआ है। लक्ष्मी-गणेश की पूजा के लिए तांबे, पीतल के नक्काशी वाले खूबसूरत दीये बिक्री के लिए दुकानों में सजा दिए गए हैं। दुकानदार राजेश कुमार बताते हैं कि धनवान लोग इस तरह के सामानों की खरीदारी कर रहे हैं।

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