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एक लाख के लोन से पश्चिमी चंपारण की संध्या ने खड़ी की बड़ी डेयरी, तंगी में राह तलाशने वालों की बनीं प्रेरणा

Published: Fri, 16 Oct 2026 02:39 PM (IST)

Jeevika Entrepreneurship Success Story: पश्चिमी चंपारण की संध्या कुमारी ने पति के कैंसर से जूझते हुए जीविका समूह से एक ...और पढ़ें

भैंस का दूध निकालतीं संध्या कुमारी।

भैंस का दूध निकालतीं संध्या कुमारी।

HighLights

  1. पति के कैंसर के बावजूद संध्या ने नहीं हारी हिम्मत।

  2. जीविका समूह से एक लाख का ऋण लेकर डेयरी शुरू की।

  3. दो मवेशियों से शुरू कर 11 मवेशियों का फार्म बनाया।

राहुल वर्मा, नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण)। Sandhya Kumari Dairy Entrepreneur: मुश्किलें इंसान की ताकत का इम्तिहान लेती हैं और जब हौसला चट्टान जैसा हो तो विपत्तियां भी सीढ़ियां बन जाती हैं।

पश्चिमी चंपारण जिले के नरकटियागंज प्रखंड के सेमरी पंचायत की रहने वाली संध्या कुमारी ने इस बात को अपने जीवन के संघर्ष से साबित कर दिखाया है।

पति को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जीविका समूह से जुड़कर महिला उद्यमिता की ऐसी इबारत लिखी जो आज ग्रामीण भारत की हर महिला के लिए स्वावलंबन और प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है।

एक लाख के लोन से शुरू हुई यात्रा

वर्ष 2018 में जब उनके पति बृजेश कुमार को कैंसर होने का पता चला, तो मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज का खर्च और दो बच्चों के भविष्य की चिंता सिर पर आ खड़ी हुई।

तीन साल तक कठिन परिस्थितियों से जूझने के बाद संध्या ने साल 2022 में जीविका स्वयं सहायता समूह का दामन थामा। यहीं से उनके उद्यमी सफर की असली शुरुआत हुई।

समूह और सास के सहयोग से मिले एक लाख रुपये के ऋण को उन्होंने अपनी लाचारी का नहीं, बल्कि कारोबार की पूंजी बनाया।

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दो मवेशियों से खड़ा किया साम्राज्य

संध्या ने अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से 40 हजार रुपये में एक दुधारू गाय और 60 हजार रुपये में उन्नत नस्ल की एक भैंस खरीदी।

उनके अथक परिश्रम और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है कि महज कुछ ही वर्षों में दो मवेशियों से शुरू हुआ यह डेयरी व्यवसाय आज बढ़कर 11 मवेशियों के एक बड़े और सफल डेयरी फार्म में तब्दील हो चुका है।

उनके इस वेंचर ने साबित कर दिया कि सही दिशा में मिला वित्तीय सहयोग और पक्का इरादा किसी भी छोटे व्यवसाय को बड़े मुकाम पर पहुंचा सकता है।

लाखों का टर्नओवर 

आज संध्या के डेयरी फार्म से सुबह-शाम मिलाकर रोजाना 40 से 45 किलोग्राम दूध का उत्पादन और विपणन होता है। इस डेयरी व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह मजबूत कर दिया है।

इसी कारोबार की बदौलत वह न सिर्फ अपने पति का कैंसर का महंगा इलाज निर्बाध करा रही हैं, बल्कि अपने दोनों बेटों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा दिला रही हैं।

बड़ा बेटा अलीगढ़ के मंगलायतन विश्वविद्यालय से BBA और छोटा बेटा वडोदरा के गति शक्ति विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल

अपनी इस व्यावसायिक सफलता के दम पर संध्या अब अपने डेयरी फार्म को एक आधुनिक और सुसज्जित फार्म के रूप में विकसित करना चाहती हैं।

उनका विजन साफ है वह चाहती हैं कि उनका यह उद्यम और फले-फूलें, ताकि वे अपने गांव और आसपास की अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ सकें और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना सकें।

एक उद्यमी के रूप में संध्या का यह सफर यह सिखाता है कि अगर पक्का इरादा हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की राह आसान कर देती हैं।

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जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को समय-समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। संध्या कुमारी ने इसका सदुपयोग करते हुए अपनी लगन और मेहनत से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया है। उन्हें आगे भी नियमानुसार सहयोग मिलता रहेगा।

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रितेश किशोर सहाय, प्रखंड परियोजना प्रबंधक, जीविका, नरकटियागंज