पिता का साया उठा तो भाई बना ढाल: अपने सपने कुर्बान कर बहनों को किया कामयाब, एक बनीं BPSC अफसर
हरनाटांड़ के शिक्षक सतीश चंद्र गुप्ता ने अपने सपनों को त्यागकर अपनी बहनों की शिक्षा और भविष्य को संवारा, जिसके ...और पढ़ें

बहन के सपनों को दी उड़ान, खुद पीछे रहकर बनाया प्रशासनिक अधिकारी
HighLights
सतीश ने बहनों के भविष्य हेतु अपने सपने कुर्बान किए।
बहन उमा कुमारी बीपीएससी पास कर अंचलाधिकारी बनीं।
यह कहानी भाई-बहन के अटूट प्रेम और त्याग का उदाहरण।
अर्जुन जायसवाल, हरनाटांड़। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और समर्पण का पर्व है। इस रिश्ते में भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। हरनाटांड़ के शिक्षक सतीश चंद्र गुप्ता ने अपनी छोटी बहनों के लिए जो किया, वह किसी उपहार से कहीं बढ़कर है।
उन्होंने अपने सपनों और अवसरों को पीछे छोड़कर भाई के साथ-साथ पिता की जिम्मेदारी भी निभाई। उनके त्याग और समर्पण का परिणाम है कि आज उनकी छोटी बहन उमा कुमारी बीपीएससी की 64वीं परीक्षा में चयनित होकर गोपालगंज जिले के पंचदेवरी अंचल में अंचलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
वर्ष 2010 में पिता रामप्रीत गुप्ता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अचानक सतीश के कंधों पर आ गईं। पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त थे और परिवार में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी। पांच बहनों और दो भाइयों के परिवार में सतीश तीसरे नंबर पर हैं।
उनकी दो बड़ी बहनों की शादी पिता पहले ही कर चुके थे। पिता के निधन के बाद छोटे भाई और तीन छोटी बहनों की पढ़ाई, शादी और भविष्य की जिम्मेदारी सतीश ने अपने कंधों पर उठा ली। उस दौर में सतीश के सामने खुद के भविष्य को संवारने के कई अवसर थे।
हालांकि, परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपने निजी सपनों को पीछे कर दिया। अपनी पूरी ऊर्जा छोटे भाई-बहनों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा दी। उन्होंने न केवल उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की, बल्कि उनकी जरूरतों और जिम्मेदारियों को भी अपना समझकर पूरा किया।
एक-एक कर मुकाम हासिल करते गए भाई-बहन:
सतीश की छोटी बहन अनिता कुमारी वर्ष 2003 में बिहार सरकार में पंचायत शिक्षिका के रूप में चयनित हुईं और वर्तमान में भी शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2014 में उनकी शादी न्यायाधीश तेज कुमार प्रसाद से हुई।
इसके बाद छोटी बहन उमा कुमारी ने बीपीएससी की 64वीं परीक्षा में सफलता हासिल कर प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वह गोपालगंज जिले के पंचदेवरी अंचल में अंचलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
वहीं, सबसे छोटी बहन अर्चना कुमारी मझौलिया प्रखंड में मनरेगा अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। सतीश के छोटे भाई आशीष कुमार गुप्ता सफल व्यवसायी होने के साथ एक निजी विद्यालय के संचालक भी हैं। उनकी पत्नी कुमुन्दनी रंजना गवर्नमेंट डिग्री कालेज भितहा में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
स्वयं सतीश चंद्र गुप्ता भी वर्ष 2014 में बिहार सरकार में शिक्षक के रूप में चयनित हुए। इस तरह परिवार के लगभग सभी सदस्य अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर अलग-अलग क्षेत्रों में मुकाम हासिल कर रहे हैं।
बहन बोलीं- भैया ने हमें सबसे बड़ा उपहार दिया:
उमा कुमारी कहती हैं कि रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहनों को तरह-तरह के उपहार देते हैं, लेकिन उनके भैया ने जो दिया, उसकी कीमत किसी उपहार से नहीं लगाई जा सकती।
उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद भैया ने हम सभी को पिता की तरह संभाला। हमारी पढ़ाई से लेकर शादी और भविष्य तक की चिंता उन्होंने अपने ऊपर ले ली। आज मैं जिस पद पर हूं, उसमें उनकी मेहनत, त्याग और विश्वास की बड़ी भूमिका है।
सतीश बोले- सफलता का असली श्रेय बहनों की मेहनत को:
सतीश चंद्र गुप्ता कहते हैं कि परिवार की आज की सफलता का पूरा श्रेय उनकी बहनों और भाई की मेहनत, लगन और संघर्ष को जाता है।
उन्होंने कहा कि मैंने परिवार के बड़े सदस्य के रूप में सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई। असली मेहनत मेरी बहनों ने की है। उन्होंने हर कठिन परिस्थिति का साहस के साथ सामना किया और कभी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटीं।
अन्य भाइयों के लिए बहनों का संदेश:
अनिता, उमा और अर्चना कहती हैं कि भाई होना सिर्फ राखी बंधवाने या बहन को उपहार देने तक सीमित नहीं है। असली भाई वही है, जो बहन के सपनों पर विश्वास करे और मुश्किल समय में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहे।
उन्होंने अन्य भाइयों से बहनों की शिक्षा को प्राथमिकता देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उनके अनुसार, एक बहन को दिया गया सबसे बड़ा उपहार उसकी शिक्षा, सम्मान और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर है।
