रक्षाबंधन पर इस बार आंशिक चंद्रग्रहण, पंडित जी ने बताया राखी की थाली में क्या रखें सामग्री
इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसमें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है।

रक्षाबंधन 2026। (जागरण)
HighLights
सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक राखी बांधना शुभ।
पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के कारण सुबह ही रस्म पूरी करें।
भारत में चंद्रग्रहण अदृश्य, पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं।
संवाद सूत्र, बगहा। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
पंचांग गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन का शुभ समय सुबह ही रहेगा। सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधना शुभ माना गया है।
खास बात यह है कि 9:48 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी, इसलिए बहनों को राखी बांधने के लिए दोपहर या शाम तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
उपलब्ध पंचांग आधारित जानकारियों में भी 9:48 बजे के बाद पूर्णिमा समाप्त होने के कारण सुबह ही रक्षाबंधन की रस्म पूरी करने की सलाह दी गई है।
आचार्य डॉ. अशोक मिश्रा के अनुसार रक्षाबंधन के दिन बहनें शुभ समय में भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें। भाई भी बहन के सम्मान, सुरक्षा और सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहने का संकल्प ले।
9:48 के बाद क्या करें?
आचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार राखी बांधने की मुख्य रस्म 9:48 बजे से पहले पूरी कर लेना बेहतर है। इसके बाद पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाने के कारण उसे रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त नहीं माना जाएगा।
इसलिए जिन घरों में भाई-बहन सुबह एक साथ मौजूद हैं, वहां पूजा और राखी की रस्म सुबह ही पूरी कर लेना उचित रहेगा।इसके बावजूद उदया तिथि के अनुसार दिन में कभी भी रक्षाबंधन कार्य कर सकते हैं।
राखी की थाली में रखें ये सामग्री
थाली में राखी, रोली या चंदन, अक्षत, दीपक, पुष्प, मिठाई और आरती की सामग्री रखें। भाई को स्वच्छ आसन पर बैठाकर बहन पहले तिलक लगाए, अक्षत लगाए, आरती उतारे और फिर दाहिनी कलाई पर राखी बांधे। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाकर उसके मंगलमय जीवन की कामना करे।
रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्रग्रहण भी
इस बार रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना भी होगी, लेकिन यह ग्रहण भारत, बिहार और बगहा में दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां रहने वाले लोगों को ग्रहण देखने को नहीं मिलेगा।
उपलब्ध खगोलीय जानकारी के अनुसार आंशिक ग्रहण भारत से दृश्य नहीं है।आचार्य डॉ. मिश्रा ने कहा कि ग्रहण को लेकर अनावश्यक भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है। रक्षाबंधन की पूजा और राखी बांधने की रस्म को निर्धारित शुभ समय में पूरा किया जा सकता है।
बगहा में बाजारों में बढ़ी राखियों की रौनक
रक्षाबंधन को लेकर बगहा के बाजारों में चहल-पहल बढ़ने लगी है। रंग-बिरंगी, रेशमी, मौली और बच्चों के लिए आकर्षक डिजाइन वाली राखियां दुकानों पर सज गई हैं।
मिठाई और उपहार की दुकानों पर भी तैयारी तेज हो गई है। आचार्य डॉ. मिश्रा ने कहा कि राखी की कीमत नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपा भाई-बहन का प्रेम सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भाई की कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र बहन की दुआ और भाई के संकल्प का प्रतीक है। इसलिए इस रक्षाबंधन पर केवल राखी न बांधें, बल्कि रिश्ते में प्रेम, सम्मान और विश्वास को और मजबूत करने का संकल्प भी लें।
