बेतिया। हमारे गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण एक बहुत बड़ी समस्या है। इस कुपोषण का मुख्य कारण हमारे बीच जागरूकता का नहीं होना है। हम यही समझते हैं कि सिर्फ भोजन करने से ही हमारे शरीर के लिए अनिवार्य सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसके लिए हमें अपनी आदत में बदलाव लाने की जरूरत है। विशेष रूप से छह माह के बाद के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं में बाहरी पोषण देना अति आवश्यक है। उक्त बाते गुरुवार को समाहरणालय में राष्ट्रीय पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सलाहकार डा. मनोज कुमार ने कही। उन्होंने कहा व्यवहार परिवर्तन के आधार पर हीं बच्चे न तो कुपोषित हो सकते हैं और न गर्भवती महिलाएं कुपोषण की शिकार हो सकती है। उक्त बातें गुरूवार को समाहरणालय में राष्ट््रीय पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सलाहकार डा. मनोज कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला को गर्भ के तीसरे हमीने से ही अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता पड़ती है। उसके दिनचर्या में भी परिवर्तन होना आवश्यक है। तभी वह ससमय बच्चे को जन्म दे सकती हैं और बच्चा कुपोषित नहीं होगा। महिलाएं भी कुपोषण की शिकार नही हो सकती हैं। वहीं जन्म के छठे माह के बाद भी बच्चे को अतिरिक्त अन्न देने की सलाह भी आवश्यक है। ताकि बच्चा कुपोषित न हो सके। बच्चों को कुपोषण से बचाकर ही बच्चों के मृत्यु दर को रोका जा सकता है। उन्होंने उपस्थित सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं को राष्ट््रीय पोषण अभियान में शामिल करने के लिए अन्नप्राशन एवं गोद भराई कार्यक्रमकों नियमित आयोजित करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सरकार की योजना है कि कुपोषण मुक्त बिहार बने। यह जिला अभी भी काफी नीचे है। इसे टॉप टेन की सूची में शामिल करने के लिए संबंधित सेविका सहायिका, महिला पर्यवेक्षिका एवं सीडीपीओ की अहम भूमिका है। बैठक में आईसीडीएस की डीपीओ डा. निरुपा कुमारी ने सभी सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं को अपनी निगरानी में गोद भराई एवं अन्नप्राशन दिवस को हर हाल में ससमय आयोजित करने का निर्देश दिया। मौके पर राज्य तकनीकी निदेशक मंतेश्वर झा, मोहम्मद तौफिक, एसआरजी मनीषा कुमारी आदि भी मौजूद रहे।

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