16 दिवसीय पितृपक्ष आज से शुरू, दानवीर कर्ण से जुड़ी है पिंडदान की पौराणिक कथा
Pitru Paksha Pind Daan Rules:आज 26 सितंबर से 16 दिवसीय पितृपक्ष शुरू हो रहा है, जिसमें श्रद्धालु पितरों के प्रति ...और पढ़ें

पितृपक्ष में तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व माना गया है। फाइल फोटो
HighLights
पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।
दानवीर कर्ण ने पितरों के लिए अन्न-जल दान किया।
गया धाम पितरों की शांति और मोक्ष का प्रमुख स्थल।
संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Karna Pitru Paksha Story: सनातन धर्म में अपने पूर्वजों यानी पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का महापर्व 'पितृपक्ष' आज 26 सितंबर से शुरू हो रहा है।
आचार्य डॉ. अशोक मिश्रा के अनुसार, 16 दिनों तक चलने वाला यह विशेष अनुष्ठान 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।
इस दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध कर्म और पिंडदान करेंगे।
दानवीर कर्ण से जुड़ी कथा
धार्मिक मान्यताओं में 16 दिनों के पितृपक्ष की परंपरा का ऐतिहासिक संबंध महाभारत काल के दानवीर कर्ण से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मृत्यु के बाद स्वर्ग पहुंचे कर्ण को भोजन के स्थान पर सोना-आभूषण दिए गए।
यमराज ने बताया कि उन्होंने जीवनभर स्वर्ण का दान तो किया, लेकिन पितरों को कभी अन्न और जल नहीं दिया। इसके बाद कर्ण को अपनी भूल सुधारने के लिए 16 दिनों के लिए पृथ्वी पर भेजा गया, जहां उन्होंने पितरों के निमित्त अन्न-जल का दान किया।
घर पर ऐसे करें तर्पण
पितृपक्ष में तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व माना गया है। यदि कोई श्रद्धालु किसी तीर्थस्थल पर जाने में असमर्थ है, तो वह घर पर भी विधि-विधान से तर्पण कर सकता है।
इसके लिए घर की दक्षिण दिशा में स्वच्छ स्थान पर कुश, गंगाजल, काले तिल, जौ और दूध से तर्पण किया जाता है। श्राद्ध कर्म के दौरान पंचबलि यानी गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी और देवों के लिए भोजन का अंश निकालना अनिवार्य है।
गया धाम का विशेष महत्व
पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए बिहार का गया धाम देश का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। मान्यता है कि गया जी के फल्गु नदी के तट पर स्वयं भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था।
गया के अलावा काशी, प्रयागराज, हरिद्वार और बद्रीनाथ में भी पितृपक्ष के दौरान देश भर से श्रद्धालु पहुंचकर अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं।
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