पशुपालन के साथ खेती मतलब डबल आमदनी, पश्चिम चंपारण में किसानों को बताए अधिक आमदनी के गुर
पश्चिम चंपारण के मझौलिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को गौ-आधारित समेकित कृषि का चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा ...और पढ़ें

HighLights
कृषि विज्ञान केंद्र, मधोपुर में गौ-आधारित कृषि प्रशिक्षण का शुभारंभ।
समेकित कृषि प्रणाली से किसानों को दोगुनी आय का अवसर मिलेगा।
गोबर-गोमूत्र से जैविक खेती लागत 30-40% तक कम होगी।
संवाद सूत्र, मझौलिया (पश्चिम चंपारण)। Gau Aadharit Kheti Training: बढ़ती खेती लागत और घटती उर्वरता के बीच गौ-आधारित समेकित कृषि किसानों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, मधोपुर में गुरुवार को चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली में गौ-पालन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
एक गाय से एक एकड़ में जैविक खेती
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के सहायक प्राध्यापक डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि फसल उत्पादन के साथ मुर्गी पालन, मछली पालन और बागवानी को जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
फसल उत्पादन वैज्ञानिक डॉ. हर्षा बी.आर. के अनुसार, गोबर व गोमूत्र से तैयार जीवामृत और घनजीवामृत से खेती की लागत 30 से 40 प्रतिशत तक घटाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि एक गाय के गोबर-गोमूत्र से एक एकड़ में जैविक खेती संभव है।
शुद्ध जैविक उत्पादों की बढ़ी मांग
कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉ. चेलपुरी रामलू ने कहा कि शुद्ध दूध, घी और जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच गौ-पालन आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने केंद्र की प्रत्यक्षण इकाइयों का भ्रमण कर समेकित कृषि की बारीकियां सीखीं। इस मौके पर स्थानीय मुखिया देवी सहनी सहित दर्जनों किसान और केंद्र के कर्मचारी मौजूद रहे।
