बगहा। वाल्मीकिनगर, सूबे के इकलौते वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल में एक तरफ वनपाल व वनरक्षी समेत कर्मचारियों का घोर कमी है। वहीं दूसरी तरफ कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को सात महीने से वेतन नहीं मिला है। जंगल व जानवरों की सुरक्षा की जिम्मेवारी दैनिक वेतनभोगी वनकर्मी लाठी के सहारे कर रहे हैं। लेकिन अब वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के वन प्रमण्डल एक व दो के आठ वन क्षेत्र मे कार्यरत करीब पांच सौ से अधिक वनकर्मियों का वेतन करीब सात माह से बाधित है। विभिन्न वन क्षेत्रों मे कार्यरत टीटी, पीपी, वायरलेस ऑपरेटर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, माली सहित अन्य को वेतन नहीं मिलने से उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वनकर्मियों के बच्चों का पढ़ाई भी ठप है। दुकानदार भी अब वनकर्मियों को राशन, कपड़ा आदि सामान देने से कतरा रहे हैं। कई दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों ने बताया कि उनके पास इलाज कराने का पैसा नहीं है। नाम नहीं छापने के शर्त पर कई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उदासीनता के कारण वेतन बकाया चल रहा है। तीज, रक्षाबंधन, दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों में भी परिवार में मायूसी छायी रही। अब धनतेरस, दीपावली, भैयादूज व छठ पूजा नजदीक है। यदि वेतन नहीं मिला तो घरों में सभी त्योहार फीका पड़ जायेगा। दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों ने कहा कि वेतन नही मिला तो वे जंगल और जानवरों की सुरक्षा छोड़कर धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवश हो जायेंगे। इस संबंध मे पूछे जाने पर वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना वन प्रमंडल दो के डीएफओ गौरव ओझा ने बताया कि बकाया वेतन जल्द दिलाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वनकर्मियों का भविष्य निधि कटौती को लेकर कुछ कागजी प्रक्रिया चल रही है, उसी के कारण से भुगतान में देरी हो रही है।

Posted By: Jagran

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