नेपाल का त्रिशूली बांध टूटा: गंडक बराज के रास्ते आ सकती है भारी तबाही, वाल्मीकिनगर से यूपी तक अलर्ट
नेपाल में त्रिशूली बांध टूटने से गंडक बराज के रास्ते भारत-नेपाल सीमा पर जलस्तर बढ़ने की आशंका है, जिससे वाल्मीकिनगर ...और पढ़ें

गंडक बराज के रास्ते आ सकती है भारी तबाही, वीटीआर प्रशासन भी अलर्ट
HighLights
नेपाल के त्रिशूली बांध टूटने से गंडक में जलस्तर बढ़ने की आशंका।
वाल्मीकिनगर से यूपी तक प्रशासन हाई अलर्ट पर, लोगों को चेताया।
वन्यजीवों के बचाव हेतु वन विभाग की टीम भी सक्रिय।
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर। नेपाल के त्रिशूली बांध के टूटने से भारत नेपाल सीमा को जोड़ने वाली ऐतिहासिक गंडक बराज के रास्ते पानी के आने से जलस्तर बढ़ने की संभावना को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन वन विभाग, गंडक जल संसाधन विभाग के कर्मी और अधिकारी हाई अलर्ट मोड पर हैं।
वाल्मीकिनगर थाना के पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार के द्वारा वाल्मीकि नगर क्षेत्र के गंडक नदी के तटवर्ती निचले इलाकों जिनमें चकदहवा, रोहुआ टोला, भेरिहारी, लवकुश घाट में माइक से प्रचार प्रसार कर सतर्क किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मरिचहवा, कुशीनगर के अलावा गोपालगंज में पानी का यह प्रवाह भारी तबाही मचा सकता है।
बताते चलें कि त्रिशूली नदी का पानी के नेपाल देवघाट तक पहुंचाने के उपरांत सिंचाई विभाग द्वारा लगाए गए सेंसर से यह जानकारी प्राप्त होगी की कितना क्यूसेक पानी का प्रवाह गंडक बराज के रास्ते प्रवाहित होने की संभावना है। देवघाट से गंडक बराज तक पानी आने में लगभग पांच घंटे का समय लगता है।
यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि बुधवार की शाम पांच बजे के बाद पानी का प्रवाह वाल्मीकि नगर पहुंच सकता है। सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता मोहम्मद इकबाल अनवर के मुताबिक सभी कर्मियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
वन विभाग हाई अलर्ट मोड पर
वाल्मीकि नगर वन क्षेत्र पदाधिकारी सत्यम कुमार के नेतृत्व में वन कर्मियों की टीम गंडक नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में मॉनिटरिंग में जुट गई है। पानी के तेज प्रवाह के साथ नेपाली क्षेत्र से वन्य जीवों के बहकर आने की संभावना बढ़ जाती है जिनका रेस्क्यू वन विभाग की पहली प्राथमिकता है।
