बगहा । वीटीआर में बरसात के मौसम पाई जाने वाली भूईफोड़ (जंगली मशरूम) की डिमांड इन दिनों खूब हो रही है। इसका वेजिटेरियन का स्वाद नॉनवेज से शानदार है। साल में एक ही बार भूईफोड़ मिलता है। यह जंगली मशरूम साल में एक ही सीजन पर शौकीनों को मिल पाता है। कड़ी धूप के बाद मानसून की बौछार पड़ते ही दीमक के टीलों के आस-पास जंगल में नजर आने वाली इस सब्जी का स्वाद चखना आम व खास लोगों के लिए क्रेज की बात है। भूईफोड लेकर बाजार में पहुंचे ग्रामीण ने बताया कि बाजार में आते ही बिक जाता है।

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शुरू में रहती है कीमत अधिक भूईफोड की आवक शुरू होते ही, तब इसका दाम अधिक होता है। इसके संग्रहण के लिए महिलाएं, पुरुष सुबह से ही निकल जाते हैं। जंगली जानवरों और जहरीले सांपों से भरपूर इन जंगलों में जोखिम उठाकर भी ये महिलाएं इस भूईफोड़ लाने जाती हैं। मानसून के सीजन में बाजार में आने वाले भूईफोड़ को देखने-चखने के लिए शौकीन लोग टूट पड़ रहे है। वीटीआर के जंगल में दीमक के टीले के आस-पास जमीन के अंदर निकलता है भूईफोड़ । यह सफेद रंग का होता है। वीटीआर में मानसून के आगमन से पहले होने वाली बारिश होने के बाद कुछ दिन जो मौसम खुला होता है। अचानक अधिक गर्मी पड़ती है, फिर जमीन के अंदर से निकाला जाता है। कहा जाता है कि जितना बादल गरजता है, भूईफोड़ उतना ही अधिक निकलता है।

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200 रुपये किलो तक बिकता है भूईंफोड़ वाल्मीकिनगर क्षेत्र वनांचल से घिरा हुआ वनोपज से भरा परिपूर्ण इलाका है। वीटीआर में भूईफोड (जंगली मशरूम) के लोग इस कदर दीवाने हैं कि दो सौ रुपये किलो कीमत होने पर भी होड़ लगी हुई है। बाजार में आते ही इसे सबसे पहले प्राप्त करने के लिए लूट मची हुई है। बाजार में बरसात के प्रारंभ होते ही इसकी आवक शुरू हो गई है और गत वर्षों की अपेक्षा इसकी आवक कम होने पर भी कीमत स्थिर है। चिकित्सक इसे स्वास्थ्य के लिए रामबाण मानते हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया है। इसके लिए ग्रामीण बड़ी संख्या में जंगलों में आग लगा देते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि जंगलों में आग लगाने से भूईफोड अधिक होता है। इस बाबत प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार ने बताया कि जंगल में यदि आग न लगाया जाए तो जंगली मशरूम का उत्पादन और भी अधिक होगा।

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