बगहा । रमजान-उल-मुबारक का पवित्र माह रहमतों और बरकतों से भरपूर है। इस महीने में अल्लाह तबारक व ताला रोजेदारों व इबादत करने वालों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं। इस महीना में अल्लाह सभी रोजेदारों के गुनाहों को माफ कर देते हैं। रमजान-उल-मुबारक में नन्हें रोजेदारों पर अल्लाह की रहमतों की बारिश होती है। इस बार बहुत तेज गर्मी पड़ रही है, लेकिन नन्हे रोजेदारों के हौसले बुलंद हैं। वे पूरी अकीदत और हिम्मत के साथ रोजे रख रहे हैं। बगहा एक के कोल्हुआ चौतरवा निवासी मो. अमानुल्लाह अंसारी के पुत्र मो. अतीउल्लाह ने कहा कि वे रोजा रख अपने परिवार समेत मुल्क के अमन व शांति के लिए रखते हैं। अल्लाह से दुआ सबकी सलामती की मांगता हूं। इस अफजल महीने में अल्लाह हर दुआ को कबूल करते हैं। कोल्हुआ निवासी शेख गफारुल के पुत्र हसीबुर्रहमान ने बताया कि रोजा रखने से मन पवित्र रहता है। दिनभर पवित्रता पूर्वक समय गुजरता है। इफ्तार के समय सभी लोग एक साथ बैठते हैं और इफ्तार करते हैं। अल्लाह से प्रतिदिन दुआ भी मांगते हैं। कोल्हुआ निवासी अफीना खातून ने बताया कि रोजा रखने से मुझे बेहद खुशी महसूस हो रही है। रोजा रखने से अल्लाह तबारक व ताला हम से खुश होंगे। परिवार के लोगों के साथ इफ्तार करती हूं। परिवार के सभी सदस्यों एवं देश में शांति के लिए अल्लाह से दुआ करती हूं। कोल्हुआ निवासी मुस्कान खातून का कहना है कि रमजान के इस पवित्र माह में हम अपने परिवार के अन्य सदस्यों की तरह रोजा रखते हैं। परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग भी मिल रहा है। प्रतिदिन तरावीह भी करती हूं। अल्लाह से अपने परिवार में सुख समृद्धि के लिए दुआ मांगती हूं।

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रोजे में ना करें शिकवा-शिकायत : हाफिज अंसारी

मौलवी हाफिज अंसारी का कहना है कि रमजान अल्लाह का महीना है। इसमें तीन असरा है। पहला रहमत का, दूसरा मगफेरत का और तीसरा दोजख से निजात पाने का असरा। रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर और बुराईयों से बचकर खुदा की खुशमुदी प्राप्त करना चाहता है। रोजे की हालत में किसी की शिकवा-शिकायत नहीं करनी चाहिए। किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। रोजा अमीरों और गरीबों के बीच एक जेहती का रिश्ता कायम करता है।

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Posted By: Jagran