बगहा। बिहार के इकलौते जंगल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के लिए तैनात वनपाल व वनरक्षी की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है। वीटीआर के दोनों वन प्रमंडलों के वनक्षेत्रों में 42 वनपाल की जगह 13 वनपाल है। जबकि 167 वनरक्षी की जगह मात्र11 वनरक्षी काम कर रहे है। इसको लेकर वीटीआर प्रशासन ने बाघों समेत जंगल और जानवरों की सुरक्षा के लिए अब अपना हाथ खड़ा कर दिया है। इसी तरह अंचल और प्रमंडलीय कार्यालय में भी कर्मचारियों की कमी हो गई है। कार्यालय में फाइलों का निष्पादन अब अकेले खुद फिल्ड डायरेक्टर और डीएफओ कर रहे हैं। वीटीआर के फिल्ड से लेकर कार्यालय तक वनपाल, वनरक्षी और अन्य कर्मियों की घोर कमी को लेकर वीटीआर प्रशासन ने केन्द्र और राज्य सरकार के वन मंत्रालय,स्टेट वाइल्ड लाइफ और नेशनल टाईगर कन्जरवेशन ऑथोरेटी को त्राहिमाम पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि वन प्रमंडल एक के मंगुराहा, रघिया, गोवर्धना, वनक्षेत्रों में 19 वनपाल की जगह 07 वनपाल हैं। और 80 वनरक्षी की जगह 04 वनरक्षी है। तथा वन प्रमंडल दो में 23 वनपाल की जगह 07 वनपाल और 87 वनरक्षी कि जगह 06 वनरक्षी है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के फिल्ड डायरेक्टर एस. चंद्रशेखर ने बताया कि इन दिनों वीटीआर के वनक्षेत्रों और अंचल व प्रमंडलीय कार्यालय में वनपाल और वनरक्षी की घोर कमी हो गई है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और फाइलों का निष्पादन प्रभावित हो गया है। हालात यह है, कि एक वनपाल और वनरक्षी दस से पंद्रह कर्मियों के प्रभार में काम कर रहा है। फिल्ड डायरेक्टर ने बताया कि इस संबंध में केन्द्र और राज्य सरकार के वन मंत्रालय,स्टेट वाइल्ड लाइफ और एनटीसीए को त्राहिमाम पत्र भेजा गया है।

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वन अपराध के मामले लंबित :

वन प्रमंडल एक और दो के डीएफओ गौरव ओझा व अम्बरीश कुमार मल्ल ने बताया कि वनक्षेत्रों में वनपाल और वनरक्षी का घोर अभाव हो गया है। सीमित कर्मियों के भरोसे जंगल क्षेत्र में शिकार,वन अपराध और अतिक्रमण हटाने का काम हो रहा है। वनपाल और वनरक्षी की कमी के कारण कई शिकार और वन अपराध के मामले में फाइलें लंबित पड़ी हुई है।इस संबंध में वरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

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रेंजर की भी कमी

जंगल के बाहर के क्षेत्रों में वन अपराध रोकने और विकास कार्यों करने को लेकर भले ही राज्य सरकार ने नए वन प्रमंडल बेतिया का गठन किया है। उस वन प्रमंडल के अंर्तगत बगहा, बेतिया व रामनगर में वनक्षेत्र कार्यालय बनाया गया है। लेकिन इस वन प्रमंडल में वनपाल और वनरक्षी की घोर कमी है। जिले के 18 प्रखंडों का काम तीन रेंजर समेत करीब आधा दर्जन वनकर्मियों के भरोसे है। डीएफओ अभिषेक कुमार ¨सह ने बताया कि वनपाल और वनरक्षी की कमी के संबंध में वरीय अधिकारी और राज्य वन मुख्यालय को अवगत कराया गया है।

--------------------------------------------------------- अमीन की कमी से सीमांकन प्रभावित : वीटीआर के वनक्षेत्रों में अमीन नहीं होने से वन भूमि का अतिक्रमण और सीमांकन का काम प्रभावित हो गया है। फिलहाल वीटीआर प्रशासन ने एक संविदा पर अमीन रखकर वन भूमि की मापी और सीमांकन का काम करा रहा है। उस संविदा अमीन के भरोसे 890 वर्ग किलोमीटर में फैले वनक्षेत्रों के भूमि का मापी और सीमांकन का काम होता। वीटीआर में अमीन नहीं होने से अतिक्रमण और सीमांकन का काम लंबित पड़ा हुआ है।

Posted By: Jagran