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20 साल बाद उठाई किताबें और फर्स्ट डिवीजन से हुई पास, मुजफ्फरपुर की जीविका दीदियों ने किया कमाल

Published: Thu, 22 Oct 2026 03:27 PM (GMT+05:30)

जीविका चनपटिया और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के 'सेकेंड चांस' कार्यक्रम के तहत 75 महिलाओं ने मैट्रिक परीक्षा पास की, जिनमें 57 ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की।

महिलाओं ने पास की परीक्षा। (जागरण)

महिलाओं ने पास की परीक्षा। (जागरण)

HighLights

  1. जीविका के प्रयास से 75 महिलाओं ने मैट्रिक परीक्षा पास की।

  2. 57 महिलाओं ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जो बड़ी सफलता है।

  3. इस वर्ष 500 महिलाओं को मैट्रिक परीक्षा दिलाने का लक्ष्य।

संवाद सूत्र, चनपटिया। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उन्हें शिक्षा से जोड़ने की दिशा में जीविका चनपटिया और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की पहल रंग ला रही है।

इसके तहत ‘सेकेंड चांस’ कार्यक्रम के माध्यम से पिछले वर्ष 2025 में कुल 30 महिलाएं परीक्षा में शामिल हुई थी, जिसमें 28 महिलाएं उत्तीर्ण हुई थी।

इस वर्ष 2026 में 85 महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया जिसमें 79 महिलाओं ने मैट्रिक की परीक्षा दिया। इनमें 75 महिलाएं उत्तीर्ण हुई जिसमें 57 महिलाएं प्रथम श्रेणी प्राप्त की।

इस सफलता से उत्साहित जीविका ने इस वर्ष 500 महिलाओं को मैट्रिक की परीक्षा दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2024 में जीविका कार्यालय चनपटिया और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से हुई थी।

पहले चरण में 30 महिलाओं ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद वर्ष 2025 में अभियान को और तेज किया गया। जीविका समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल संघों की बैठकों के माध्यम से उन महिलाओं तक जानकारी पहुंचाई गई, जिनकी पढ़ाई किसी कारणवश छूट गई थी।

अभियान के तहत बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड से मैट्रिक करने के लिए 85 महिलाओं का पंजीकरण कराया गया। इनमें 79 महिलाओं ने मुजफ्फरपुर केंद्र पर जाकर परीक्षा दी।

इनमें से 75 महिलाएं सफल हुईं। पंजीकरण कराने वाली महिलाओं को पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से एक वर्ष तक तैयारी कराई गई। परीक्षा में शामिल होने वाली महिलाओं को बोर्ड की ओर से निःशुल्क पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गईं।

18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं ने दिखाई हिम्मत

इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं ने हिस्सा लिया। किसी की पढ़ाई पांच साल पहले छूट गई थी तो किसी ने 20 साल बाद दोबारा किताबें उठाईं।

इन महिलाओं ने घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखी। कई महिलाएं जीविका में सीएम पद पर काम करते हुए भी पढ़ाई और काम के बीच तालमेल बनाकर आगे बढ़ीं।

जीविका चनपटिया के प्रखंड परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार रजक ने बताया कि पिछले वर्ष मिली सफलता से प्रेरित होकर इस बार अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।

इस वर्ष 500 महिलाओं का पंजीकरण कराकर उन्हें मैट्रिक की परीक्षा दिलाने का लक्ष्य है। इसके लिए जीविका समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल संघों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को दोबारा पढ़ाई का अवसर देना ‘सेकेंड चांस’ कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। जिन महिलाओं की पढ़ाई बीच में छूट गई है, वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ा सकती हैं।

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