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नेपाल ने भारतीयों को फिर दिया झटका, अब भिखनाठोरी बॉर्डर से भी चारपहिया वाहनों की Entry बंद

Published: Sun, 05 Jul 2026 05:20 PM (GMT+05:30)

India Nepal Border: नेपाल ने 3 जुलाई से भिखनाठोरी सीमा पर बिना भंसार के चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर ...और पढ़ें

चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक के बाद पैदल प्रवेश करते लोग। । सौ. इंटरनेट मीडिया

चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक के बाद पैदल प्रवेश करते लोग। । सौ. इंटरनेट मीडिया 

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जागरण संवाददाता, नरकटियागंज/ गौनाहा (पश्चिम चंपारण)। Bhiknathori Border News: भारत-नेपाल सीमा के भिखनाठोरी बॉर्डर से बिना भंसार (कस्टम ड्यूटी) कराए नेपाल जाने वाले चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

नेपाल प्रशासन ने इस नई व्यवस्था को तीन जुलाई से बेहद सख्ती के साथ लागू कर दिया है। इसके बाद से सीमा पार करने वाले सैलानियों, सीमावर्ती व्यापारियों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इनरवा बॉर्डर पर पहले से ही यह व्यवस्था लागू थी, लेकिन अब भिखनाठोरी सीमा पर भी इसे कड़ाई से प्रभावी कर दिया गया है।

SSB कैंप के पास नो-एंट्री का नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए भिखनाठोरी स्थित एसएसबी (SSB) कैंप के समीप एक सूचना बोर्ड लगा दिया गया है। इस नोटिस में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि बिना भंसार कराए किसी भी चार पहिया वाहन को नेपाल की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों से नेपाल पुलिस और एपीएफ (APF) द्वारा भारी जुर्माना वसूला जाएगा। एसएसबी भी भारतीय वाहनों को नेपाल की सीमा में जाने से रोक रही है, ताकि भारतीय नागरिकों को वहां जुर्माने की कार्रवाई से बचाया जा सके।

पैदल सीमा पार करने को मजबूर

इस नए और अचानक लागू हुए नियम के कारण भारत से नेपाल जाने वाले लोग अपनी गाड़ियां सीमा से पहले ही पंडई नदी के किनारे अथवा भिखनाठोरी गांव में खड़ी करने को मजबूर हैं। इसके बाद लोग इस चिलचिलाती धूप में पैदल ही नेपाल जा रहे हैं।

अचानक आई इस तब्दीली से सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि हाल ही में नेपाल के गृह मंत्री के सीमावर्ती क्षेत्र के दौरे के बाद यह कड़ा फैसला लिया गया है।

पर्यटकों और कारोबारियों को झटका

  • सैलानियों की बढ़ी मुसीबत: पर्यटकों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के इस नियम को अचानक लागू कर दिया गया, जिससे पारिवारिक कार्यक्रमों या घूमने जा रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
  • लाखों के कारोबार पर असर: भिखनाठोरी बॉर्डर से रोजाना करीब 100 से 150 चार पहिया वाहन नेपाल के ठोरी बाजार और वहां के पर्यटन स्थलों तक जाते थे। भारतीय पर्यटक वहां खरीदारी, होटल और खानपान पर प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये खर्च करते हैं, जो अब पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

नेपाल के ठोरी बाजार में मायूसी

नेपाल सरकार के इस फैसले से सीमा पार ठोरी बाजार के स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों में भारी मायूसी है। नेपाली कारोबारियों का कहना है कि अचानक पर्यटकों की संख्या घटने से होटल व्यवसाय और छोटे दुकानदारों की कमर टूट गई है।

नेपाल के स्थानीय निवासी सुशांत सिंह ठाकुरी, धीर सिंह, दिग्विजय सिंह, अजल और सूरज लामा ने बताया कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं।

ऐसे में दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को सहज बनाए रखने के लिए नियमों में थोड़ी ढील दी होनी चाहिए, ताकि सीमावर्ती अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप न हो।