बगहा । हर मुसलमान के लिए रोजा फर्ज है। रोजा अल्लाह को बहुत प्यारा है। सभी को रोजा के जरिए रजा और खुशी हासिल होती है। इस बार रोजा रोजेदारों का कड़ा इम्तेहान ले रहा है। चिलचिलाती धूप व गर्मी में रोजेदारों को बहुत परेशानी हो रही है। बावजूद रोजेदार, धूप, गर्मी की कोई परवाह नहीं कर रहे हैं। सुबह सेहरी खाने के बाद दिन भर गर्मी व धूप से बेहाल रहने के बावजूद रोजे से मुंह नहीं मोड़ रहे। मस्जिद में पांच वक्त की नमाज पढ़ने के साथ नियमित तरावीह पढ़ रहे हैं। रोजा में अल्लाह रोजेदारों की सभी दुआ कबूल करता है। रोजेदार को इस माह अपने पूरे परिवार के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपया फितरा निकालना होता है। इस रकम को अपने आसपास के गरीब मजबूर लोगों को देना होता है। ताकि, वे लोग भी खुशी के साथ ईद का त्यौहार मना सकें। रोजा का एक- एक पल इबादत में गुजारना चाहिए।

---------------------------------- गर्मी व धूप के बावजूद नन्हें रोजेदार रख रहे रोजा :

नगर के रत्नमाला निवासी हाफिज अलीराजा की 11 वर्षीया पुत्री सुमैया खातून लगातार रोजा रख रही है। गर्मी को देख उसकी मां ने रोजा रखने से मना किया था। लेकिन, वह नहीं मानी। उसका कहना है कि आप लोग सब नेकी कमाना चाहते है। मैं भी अल्लाह को राजी करके अपने गुनाह को माफ करवाउंगी।

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ईदगाह मोहल्ला वार्ड 31 निवासी मो. चुन्नू की 12 वर्षीया पुत्री साइमा खातून कहती है कि घर के सभी लोग रोजा रखते है। उनके साथ सेहरी खाने, नमाज पढ़ने के बाद एक साथ इफ्तार करना अच्छा लगता है। अल्लाह से अपने व पूरे परिवार के लिए जन्नत और खुशी की दुआ मांगती हूं।

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रत्नमाला निवासी लालबाबू खान का 10 वर्षीय पुत्र जुनैद आलम अब तक के सभी रोजे पूरी पाबंदी के साथ रखता है। वह कहता है, अल्लाह को रोजा बहुत पसंद है। रोजा में सब गुनाह अल्लाह माफ करता है। एक नेकी की जगह 70 नेकी देता है। मैं सभी रोजा रखूंगा ।

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नगर के ईदगाह मोहल्ला निवासी चुन्नू मियां का 12 वर्षीय पुत्र मो. वाजिद अब तक के सभी रोजा रखते आए हैं। रोजा के साथ-साथ नमाज और तरावीह पढ़ रहा है। वह कहता है कि रोजा सबसे अफजल महीना है। इसका एक-एक पल कीमती है। मैं पूरे दिल से अल्लाह को राजी करने के लिए रोजा रख रहा हूं।

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कहते हैं दिन के जानकार : बगहा डफाली निवासी इमाम शमसुद्दीन खान कहते है कि रमजान सभी महीनों में अफजल होता है। इसी माह कुरान नाजिल हुआ था। हर मुसलमान पर रोजा फर्ज है। अल्लाह इस महीने सभी के गुनाह को माफ करता है। इस पवित्र माह में अल्लाह अपने बंदों पर मेहरबान रहता है। रोजे के साथ नमाज पढ़ना फर्ज है। तरावीह सुन्नत है। तरावीह अवश्य पढ़नी चाहिए। आम दिनों के बजाय इस माह में एक नेकी पर अल्लाह 70 नेकी देता है। रोजे के दौरान ना बुरा कहें, न बुरा सुने, न बुरा करें। रोजा शरीर के सभी अंगों का होता है।

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Posted By: Jagran

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