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सुहाग की सलामती और मनचाहे वर की आस, 14 सितंबर को रखा जाएगा हरितालिका तीज का निर्जला व्रत

Published: Tue, 08 Sep 2026 03:59 PM (IST)

सुहागिन महिलाएं 14 सितंबर को अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखेंगी। कुंवारी ...और पढ़ें

अखंड सौभाग्य की कामना से 14 सितंबर को रखेंगी हरितालिका तीज व्रत (AI Generated Image)

अखंड सौभाग्य की कामना से 14 सितंबर को रखेंगी हरितालिका तीज व्रत (AI Generated Image)

HighLights

  1. 14 सितंबर को सुहागिनें रखेंगी हरितालिका तीज व्रत।

  2. पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना।

  3. प्रदोष काल में उमा-महेश्वर का विधि-विधान से पूजन।

संवाद सूत्र, बगहा। अखंड सौभाग्य की रक्षा, पति की दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं 14 सितंबर को हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखेंगी। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनोवांछित वर की प्राप्ति की कामना से इस व्रत का पालन करेंगी।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाने वाला हरितालिका तीज व्रत इस बार 14 सितंबर को रखा जाएगा।

पंडित अंकित शास्त्री के अनुसार, तृतीया तिथि 13 सितंबर को प्रातः 7:15 बजे से प्रारंभ होकर 14 सितंबर को प्रातः 7:29 बजे तक रहेगी। शास्त्रोक्त नियमों एवं उदयकाल व्यापिनी तिथि के सिद्धांत के अनुसार इस बार हरितालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखना सर्वथा श्रेष्ठ एवं शास्त्रसम्मत है।

भविष्यत्तर पुराण एवं धर्मशास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मुहूर्त मात्र भी विद्यमान हो, तो उसी दिन व्रत रखने का विधान है। इसी आधार पर 14 सितंबर को तीज व्रत रखा जाएगा।

पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी है तीज की परंपरा:

आचार्य दीपेंद्र मिश्रा ने बताया कि ‘हरितालिका’ शब्द की व्युत्पत्ति माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक कथा से हुई है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी।

उनकी तपस्या, साधना और अटूट आस्था से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पति रूप में स्वीकार किया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में हरितालिका तीज व्रत की परंपरा चली आ रही है।

मान्यता है कि माता पार्वती की तरह श्रद्धा और निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा कुंवारी कन्याओं को मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है।

प्रदोष काल में होगा उमा-महेश्वर का पूजन:

14 सितंबर को व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जल उपवास रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में मिट्टी से निर्मित उमा-महेश्वर एवं भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजन-अर्चना की जाएगी।

मंगल द्रव्यों के साथ षोडशोपचार पूजन कर भगवान शिव और माता पार्वती से अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।

रात्रि जागरण के बाद 15 सितंबर को होगा पारण:

पूजन के बाद व्रती महिलाएं हरितालिका तीज की कथा का श्रवण करेंगी तथा रात्रि जागरण करेंगी। अगले दिन 15 सितंबर की सुबह व्रत का पारण किया जाएगा। तीज को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह है। घरों में पूजन सामग्री की तैयारी के साथ-साथ पर्व को लेकर खरीदारी भी शुरू हो गई है।

सुहागिन महिलाएं इस दिन नए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री एवं पूजन सामग्री के साथ माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना कर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति की कामना करेंगी।