गंडक नदी का रौद्र रूप, पश्चिम चंपारण और मधुबनी में कटाव से गांवों पर मंडराया खतरा, बचाव कार्य में देरी
नेपाल और तराई क्षेत्रों में बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से पश्चिम चंपारण और मधुबनी के सिसई ...और पढ़ें

सोहगी बरवा में कटाव करती गंडक । सौजन्य-ग्रामीण
संवाद सूत्र, मधुबनी। प्रखंड के सिसई पंचायत में गंडक नदी एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का कारण बनने लगी है। नेपाल और तराई क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे पंचायत के सोहगी बरवा सहित कई स्थानों पर कटाव शुरू हो गया है।
कटाव की शुरुआत होते ही ग्रामीणों में भय का माहौल व्याप्त हो गया है। ग्रामीण बाबूलाल साह, चुनमुन यादव, रामेश्वर यादव, मो. सफीक गद्दी, अनिल यादव, रूदल यादव, आदिम गद्दी और करामात गद्दी ने बताया कि यह अभी केवल शुरुआत है।
यदि आने वाले दिनों में बारिश जारी रही तो हालात भयावह हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष गंडक नदी के कटाव में सौ से अधिक लोगों के घर और सैकड़ों एकड़ फसलयुक्त जमीन नदी में समा गई थी।
ग्रामीणों के अनुसार जल संसाधन विभाग को 15 मई तक कटावरोधी कार्य पूरा कर लेना था, लेकिन अब तक कार्य शुरू भी नहीं हो सका है। यहां तक कि विभाग द्वारा अब तक इस्टीमेट भी तैयार नहीं किया गया है। इससे पंचायत के लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष गंडक नदी सिसई पंचायत में भारी तबाही मचाती है। नदी के कटाव से किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो जाती है और गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगता है।
पंचायत के मुखिया कृष्णा यादव ने बताया कि बाढ़ आने पर पंचायत के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। करीब पांच हजार की आबादी वाली इस पंचायत में बाढ़ और कटाव स्थायी समस्या बन चुकी है।
मुखिया ने बताया कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया तो इस वर्ष भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कटाव को लेकर प्रखंड प्रशासन और स्थानीय विधायक को आवेदन देकर जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। बरसात शुरू होने से पहले सुरक्षा कार्य पूरा कराना जरूरी है, ताकि लोगों की जान-माल और खेती को बचाया जा सके।
जिला प्रशासन द्वारा फ्लड कंट्रोल विभाग बगहा को कटावरोधी कार्य का इस्टीमेट तैयार कर विभाग को भेजने का निर्देश प्राप्त हुआ है।
नन्दलाल राम, अंचलाधिकारी, मधुबनी।
एक जून से शुरू होगा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य, तटबंधों की सुरक्षा को लेकर विभाग अलर्ट
पिपरासी । पिपरा-पिपरासी तटबंध और चंपारण तटबंध पिछले वर्ष आई बाढ़ में कहीं नहीं टूटे थे, हालांकि कुछ स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त जरूर हुए थे। जल संसाधन विभाग ने उन स्थलों को चिन्हित कर कटावरोधी कार्य पूरा कर लिया है।
विभाग का दावा है कि फिलहाल उन स्थानों पर किसी प्रकार के कटाव का खतरा नहीं है। हालांकि तटबंध के दोनों तरफ बने रेनकट और रेन होल की अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है।
विभाग ने बताया कि इनकी मरम्मत एक जून से शुरू होने वाले बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के तहत कराई जाएगी। पहले यह कार्य 15 जून से शुरू होता था, लेकिन सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए अब एक जून से ही बरसात अवधि की शुरुआत मान ली है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार कटावरोधी कार्य 15 मई तक पूरा कर लिया गया है। अब अभियंता बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की तैयारी में जुट जाएंगे। इसके लिए पोकलेन, जेसीबी, जनरेटर और मोबाइल एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। संभावित कटाव स्थलों पर जिओ बैग और बालू भरी बोरियों का भंडारण भी किया जाएगा। विभाग इसकी तैयारी में तेजी से लगा हुआ है।
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल बगहा डिवीजन द्वारा कटावरोधी कार्य का प्राक्कलन तैयार कर भेजा गया था, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। दूसरी ओर ग्रामीणों में संभावित बाढ़ और कटाव को लेकर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीण रमाशंकर यादव, धनेश कुमार, राम मनोहर और प्रदीप कुमार ने बताया कि गंडक नदी का कटाव इस वर्ष भी होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि चंपारण तटबंध टूटा तो दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाएगा। ग्रामीणों ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में चंपारण तटबंध करीब 38 मीटर टूट गया था, जिससे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
बीते वर्ष पीपी तटबंध के बाढ़ से क्षतिग्रस्त स्थल पर कटावरोधी कार्य कराकर उसे सुरक्षित कर लिया गया है।
रवि कुमार ठकुराई, सहायक अभियंता, सेमरबारी वन।
